किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जेहिं सायक मारा मैं बाली। तेहिं सर हतौं मूढ़ कहँ काली।।
मूल पाठ
जेहिं सायक मारा मैं बाली। तेहिं सर हतौं मूढ़ कहँ काली।।
जासु कृपाँ छूटहीं मद मोहा। ता कहुँ उमा कि सपनेहुँ कोहा।।
स्रोत अभिलेख 4.18 · पुस्तक पृ. 699, 700
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिस बाणसे मैंने बालिको मारा था, उसी बाणसे कल उस मूढ़को मारूँ! [शिवजी कहते हैं—] हे उमा! जिनकी कृपासे मद और मोह छूट जाते हैं, उनको कहीं स्वप्रमें भी क्रोध हो सकता है? [यह तो लीलामात्र है]॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 699 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जेहिं सायक मारा मैं बाली। तेहिं सर हतौं मूढ़ कहँ काली।।
English explanation
With the very arrow with which I killed Bali, I will kill this fool tomorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिससे | with which |
| सायक | बाण | arrow |
| मारा | मार डाला | killed |
| मैं | मैंने | I |
| बाली | बाली को, सुग्रीव के भाई को | Bali, Sugriva's brother |
| तेहिं | उसी से | with that very |
| सर | बाण | arrow |
| हतौं | मैं मारूँगा | I will kill |
| मूढ़ | मूर्ख; यहाँ सुग्रीव | the fool; here, Sugriva |
| कहँ | को | object marker |
| काली | कल | tomorrow |
2 जासु कृपाँ छूटहीं मद मोहा। ता कहुँ उमा कि सपनेहुँ कोहा।।
English explanation
Uma, can he whose grace frees one from pride and delusion have anger even in a dream?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिसकी | whose |
| कृपाँ | कृपा से | through grace |
| छूटहीं | छूट जाते हैं | fall away; are dispelled |
| मद | अहंकार | pride |
| मोहा | मोह | delusion, attachment |
| ता | उसको | to him |
| कहुँ | को | to; marks the experiencer |
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| कि | क्या | can; interrogative particle |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in a dream |
| कोहा | क्रोध | anger |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 699
- सहायक विषय
- श्रीरामकी सुग्रीवपर नाराजी, लक्ष्मणजीका कोप
- मुद्रित पृष्ठ
- 699, 700
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।