किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कतहुँ रहउ जौं जीवति होई। तात जतन करि आनेउँ सोई।।
मूल पाठ
कतहुँ रहउ जौं जीवति होई। तात जतन करि आनेउँ सोई।।
सुग्रीवहुँ सुधि मोरि बिसारी। पावा राज कोस पुर नारी।।
स्रोत अभिलेख 4.18 · पुस्तक पृ. 699, 700
भावार्थ
मूल पाठ के बादकहीं भी रहे, यदि जीती होगी तो हे तात! यत्न करके मैं उसे अवश्य लाऊँगा। राज्य, खजाना, नगर और स्त्री पा गया, इसलिये सुग्रीवने भी मेरी सुधि भुला दी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 699 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कतहुँ रहउ जौं जीवति होई। तात जतन करि आनेउँ सोई।।
English explanation
Wherever she may be, if she is alive, dear brother, I will make every effort and bring her back.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कतहुँ | कहीं भी | wherever |
| रहउ | रहें | she may be staying |
| जौं | यदि | if |
| जीवति | जीवित | alive |
| होई | हों | she is |
| तात | हे प्रिय भाई | dear brother |
| जतन | प्रयास | effort |
| करि | करके | having made |
| आनेउँ | मैं ले आऊँगा | I will bring her back |
| सोई | उन्हीं को, सीता को | her, that very Sita |
2 सुग्रीवहुँ सुधि मोरि बिसारी। पावा राज कोस पुर नारी।।
English explanation
Sugriva too has forgotten me, having gained his kingdom, treasury, city, and wife.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुग्रीवहुँ | सुग्रीव ने भी | Sugriva too |
| सुधि | स्मरण, सुधि | remembrance |
| मोरि | मेरी | of me; my |
| बिसारी | भुला दी | has forgotten |
| पावा | प्राप्त किया | obtained |
| राज | राज्य | kingdom |
| कोस | खजाना | treasury |
| पुर | नगर | city |
| नारी | पत्नी | wife |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 699
- सहायक विषय
- श्रीरामकी सुग्रीवपर नाराजी, लक्ष्मणजीका कोप
- मुद्रित पृष्ठ
- 699, 700
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