किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बरषा गत निर्मल रितु आई। सुधि न तात सीता कै पाई।।
मूल पाठ
बरषा गत निर्मल रितु आई। सुधि न तात सीता कै पाई।।
एक बार कैसेहुँ सुधि जानौं। कालहु जीत निमिष महुँ आनौं।।
स्रोत अभिलेख 4.18 · पुस्तक पृ. 699, 700
भावार्थ
मूल पाठ के बादवर्षा बीत गयी, निर्मल शरद्-ऋतु आ गयी। परन्तु हे तात! सीताकी कोई खबर नहीं मिली। एक बार कैसे भी पता पाऊँ तो कालको भी जीतकर पलभरमें जानकीको ले आऊँ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 699 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बरषा गत निर्मल रितु आई। सुधि न तात सीता कै पाई।।
English explanation
The rains have passed and clear autumn has arrived; yet, dear brother, no news of Sita has been found.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरषा | वर्षा ऋतु | the rainy season |
| गत | बीत गई | has passed |
| निर्मल | स्वच्छ, निर्मल | clear, unclouded |
| रितु | ऋतु; यहाँ शरद | season; here, autumn |
| आई | आ गई | has arrived |
| सुधि | खबर | news |
| न | नहीं | not |
| तात | हे प्रिय भाई | dear brother |
| सीता | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama's wife |
| कै | की | of |
| पाई | मिली | was obtained |
2 एक बार कैसेहुँ सुधि जानौं। कालहु जीत निमिष महुँ आनौं।।
English explanation
If only I could somehow learn news of Sita, I would overcome even Death and bring her back in an instant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक | one |
| बार | बार | time; once |
| कैसेहुँ | किसी भी तरह | somehow, by any means |
| सुधि | सीता की खबर | news of Sita |
| जानौं | मैं जान लूँ | I may learn |
| कालहु | काल को भी | even Death |
| जीत | जीतकर | having overcome |
| निमिष | पलक झपकने का समय | an instant |
| महुँ | में | in |
| आनौं | मैं ले आऊँ | I would bring her back |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 699
- सहायक विषय
- श्रीरामकी सुग्रीवपर नाराजी, लक्ष्मणजीका कोप
- मुद्रित पृष्ठ
- 699, 700
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।