किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जरठ भयउँ अब कहइ रिछेसा। नहिं तन रहा प्रथम बल लेसा।।
मूल पाठ
जरठ भयउँ अब कहइ रिछेसा। नहिं तन रहा प्रथम बल लेसा।।
जबहिं त्रिबिक्रम भए खरारी। तब मैं तरुन रहेउँ बल भारी।।
स्रोत अभिलेख 4.29 · पुस्तक पृ. 709, 710
भावार्थ
मूल पाठ के बादऋक्षराज जाम्बवान् कहने लगे—मैं अब बूढ़ा हो गया। शरीरमें पहलेवाले बलका लेश भी नहीं रहा। जब खरारि (खरके शत्रु श्रीराम) वामन बने थे, तब मैं जवान था और मुझमें बड़ा बल था॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 710 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जरठ भयउँ अब कहइ रिछेसा। नहिं तन रहा प्रथम बल लेसा।।
English explanation
Jambavan, king of the bears, says: I have now grown old; not even a trace of my former strength remains in my body.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जरठ | बूढ़ा | old |
| भयउँ | मैं हो गया हूँ | I have become |
| अब | अब | now |
| कहइ | कहते हैं | says |
| रिछेसा | ऋक्षराज जाम्बवान | Jambavan, king of the bears |
| नहिं | नहीं | not |
| तन | शरीर में | in the body |
| रहा | बचा है | remains |
| प्रथम | पहले के | former |
| बल | बल का | of strength |
| लेसा | लेश भी | even a trace |
2 जबहिं त्रिबिक्रम भए खरारी। तब मैं तरुन रहेउँ बल भारी।।
English explanation
When the Lord, the foe of Khara, assumed the three-striding form of Trivikrama, I was young and possessed great strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जबहिं | जब | when |
| त्रिबिक्रम | तीन पगों वाले त्रिविक्रम रूप में | Trivikrama, the three-striding form |
| भए | हुए | became; assumed the form |
| खरारी | खर के शत्रु प्रभु | the Lord, foe of Khara |
| तब | तब | then |
| मैं | मैं, जाम्बवान | I, Jambavan |
| तरुन | युवा | young |
| रहेउँ | था | was |
| बल | शक्ति | strength |
| भारी | बहुत अधिक | great; abundant |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 710
- सहायक विषय
- समुद्र लाँघनेका परामर्श, जाम्बवन्तका हनुमान्जीको बल याद दिलाकर उत्साहित करना
- मुद्रित पृष्ठ
- 709, 710
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।