किष्किन्धाकाण्ड · दोहा 29 · दोहा/सोरठा
बलि बाँधत प्रभु बाढेउ सो तनु बरनि न जाई।
बलि बाँधत प्रभु बाढेउ सो तनु बरनि न जाई।
उभय धरी महँ दीन्ही सात प्रदच्छिन धाइ।।29।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 4.29 · पुस्तक पृ. 709, 710
भावार्थ और शब्दार्थ
1बलि बाँधत प्रभु बाढेउ सो तनु बरनि न जाई।
राजा बलि को बाँधते समय प्रभु इतने बढ़े कि उनके उस शरीर का वर्णन नहीं किया जा सकता।
English explanation
While binding King Bali, the Lord grew so vast that his body cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बलि | राजा बलि को | King Bali |
| बाँधत | बाँधते समय | while binding |
| प्रभु | प्रभु, त्रिविक्रम | the Lord, Trivikrama |
| बाढेउ | बढ़े; विशाल हुए | grew; expanded |
| सो | वह | that |
| तनु | शरीर | body |
| बरनि | वर्णन किया | described |
| न | नहीं | not |
| जाई | जा सकता | can be |
2 उभय धरी महँ दीन्ही सात प्रदच्छिन धाइ।।29।।
मैंने दौड़कर दो घड़ियों में उनकी सात परिक्रमाएँ कीं—यहाँ ‘धरी’ का पाठ अनिश्चित है।
English explanation
I ran around him seven times within two gharis—assuming ‘धरी’ denotes that time unit; the supplied reading is uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उभय | दो | two |
| धरी | संभवतः घड़ियाँ, समय की इकाइयाँ | probably gharis, units of time |
| महँ | में | within |
| दीन्ही | मैंने कीं | I performed |
| सात | सात | seven |
| प्रदच्छिन | परिक्रमाएँ | circumambulations |
| धाइ | दौड़कर | running |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 29
- स्रोत अभिलेख
- 4.29
- सहायक विषय
- समुद्र लाँघनेका परामर्श, जाम्बवन्तका हनुमान्जीको बल याद दिलाकर उत्साहित करना
- मुद्रित पृष्ठ
- 709, 710
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।