किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहत अनुज सन कथा अनेका। भगति बिरति नृपनीति बिबेका।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजी छोटे भाई लक्ष्मणजीसे भक्ति, वैराग्य, राजनीति और ज्ञानकी अनेकों कथाएँ कहते हैं। वर्षाकालमें आकाशमें छाये हुए बादल गरजते हुए बहुत ही सुहावने लगते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 695 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहत अनुज सन कथा अनेका। भगति बिरति नृपनीति बिबेका।।
बरषा काल मेघ नभ छाए। गरजत लागत परम सुहाए।।
स्रोत अभिलेख 4.13 · पुस्तक पृ. 695, 695
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहत अनुज सन कथा अनेका। भगति बिरति नृपनीति बिबेका।।
English explanation
Rama tells his younger brother many things about devotion, detachment, royal governance, and discernment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हैं | tells |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | younger brother Lakshmana |
| सन | से | to |
| कथा | बातें और कथाएँ | accounts and teachings |
| अनेका | अनेक | many |
| भगति | भक्ति | devotion |
| बिरति | वैराग्य | detachment |
| नृपनीति | राजधर्म और शासननीति | principles of royal governance |
| बिबेका | विवेक | discernment |
2 बरषा काल मेघ नभ छाए। गरजत लागत परम सुहाए।।
English explanation
In the rainy season, clouds covered the sky; their thunder makes them seem exceedingly pleasing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरषा | वर्षा | rainy |
| काल | ऋतु | season |
| मेघ | बादल | clouds |
| नभ | आकाश में | in the sky |
| छाए | छा गए | spread over |
| गरजत | गरजते हुए | thundering |
| लागत | लगते हैं | seem |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| सुहाए | सुहावने | pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 695
- सहायक विषय
- वर्षा-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 695, 695
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।