किष्किन्धाकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मंगलरुप भयउ बन तब ते । कीन्ह निवास रमापति जब ते।।
मूल पाठ
मंगलरुप भयउ बन तब ते । कीन्ह निवास रमापति जब ते।।
फटिक सिला अति सुभ्र सुहाई। सुख आसीन तहाँ द्वौ भाई।।
स्रोत अभिलेख 4.13 · पुस्तक पृ. 695, 695
भावार्थ
मूल पाठ के बादजबसे रमापति श्रीरामजीने वहाँ निवास किया तबसे वन मङ्गलस्वरूप हो गया। सुन्दर स्फटिकमणिकी एक अत्यन्त उज्ज्वल शिला है, उसपर दोनों भाई सुखपूर्वक विराजमान हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 695 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मंगलरुप भयउ बन तब ते । कीन्ह निवास रमापति जब ते।।
English explanation
Ever since Rama, husband of Lakshmi, made his dwelling there, the forest became auspicious.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंगलरुप | मंगलमय | auspicious |
| भयउ | हो गया | became |
| बन | वन | forest |
| तब | तब | then |
| ते | से | from |
| कीन्ह | किया | made |
| निवास | निवास | dwelling |
| रमापति | लक्ष्मी के पति, राम | Rama, husband of Lakshmi |
| जब | जब | when |
| ते | से | since |
2 फटिक सिला अति सुभ्र सुहाई। सुख आसीन तहाँ द्वौ भाई।।
English explanation
There the two brothers sit comfortably on a very bright, lovely crystal rock.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फटिक | स्फटिक की | crystal |
| सिला | शिला | rock |
| अति | अत्यंत | very |
| सुभ्र | उजली | bright white |
| सुहाई | सुंदर | lovely |
| सुख | सुखपूर्वक | comfortably |
| आसीन | बैठे हुए | seated |
| तहाँ | वहाँ | there |
| द्वौ | दोनों | both |
| भाई | भाई राम और लक्ष्मण | brothers Rama and Lakshmana |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- किष्किन्धाकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 4.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 695
- सहायक विषय
- वर्षा-ऋतु-वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 695, 695
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।