उत्तरकाण्ड · सोरठा 2 (ख) · सोरठा
भरत चरन सिरु नाइ तुरित गयउ कपि राम पहिं।
मूल पाठ
भरत चरन सिरु नाइ तुरित गयउ कपि राम पहिं।
कही कुसल सब जाइ हरषि चलेउ प्रभु जान चढ़ि॥ २ (ख)॥
स्रोत अभिलेख 7.2 · पुस्तक पृ. 907, 908
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर भरतजीके चरणोंमें सिर नवाकर हनुमान्जी तुरंत ही श्रीरामजीके पास [लौट] गये और जाकर उन्होंने सब कुशल कही। तब प्रभु हर्षित होकर विमानपर चढ़कर चले॥ २ (ख)॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 909 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1भरत चरन सिरु नाइ तुरित गयउ कपि राम पहिं।
English explanation
Bowing his head at Bharata’s feet, Hanuman quickly went to Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत के | Bharata’s |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| सिरु | सिर | head |
| नाइ | झुकाकर | having bowed |
| तुरित | तुरंत | quickly |
| गयउ | गए | went |
| कपि | हनुमान | Hanuman, the monkey messenger |
| राम | राम के | Rama |
| पहिं | पास | to; near |
2 कही कुसल सब जाइ हरषि चलेउ प्रभु जान चढ़ि॥ २ (ख)॥
English explanation
Having reached him, Hanuman reported everyone’s well-being; Lord Rama joyfully boarded the aerial vehicle and set out.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कही | बताया | reported |
| कुसल | कुशल-समाचार | news of well-being |
| सब | सबका; सारा | everyone’s; all |
| जाइ | जाकर | having gone there |
| हरषि | प्रसन्न होकर | joyfully |
| चलेउ | चले | set out |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| जान | विमान; सवारी | aerial vehicle; conveyance |
| चढ़ि | चढ़कर | having boarded |
| ख | पद्य-संदर्भ चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- सोरठा 2 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 909
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 907, 908
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।