उत्तरकाण्ड · सोरठा 68 (क) · सोरठा
गयउ मोर संदेह सुनेउँ सकल रघुपति चरित।
गयउ मोर संदेह सुनेउँ सकल रघुपति चरित।
भयउ राम पद नेह तव प्रसाद बायस तिलक॥ ६८ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.68 · पुस्तक पृ. 971, 972
भावार्थ और शब्दार्थ
1गयउ मोर संदेह सुनेउँ सकल रघुपति चरित।
एआई-प्रारूप अर्थ: मेरा संदेह दूर हो गया; मैंने श्रीराम का समस्त चरित सुन लिया।
English explanation
AI-draft meaning: My doubt has departed; I have heard the entire account of Lord Rama’s deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गयउ | दूर हो गया | departed |
| मोर | मेरा | my |
| संदेह | संदेह | doubt |
| सुनेउँ | मैंने सुन लिया | I have heard |
| सकल | समस्त | entire |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी श्रीराम का | of Rama, lord of the Raghu dynasty |
| चरित | चरित; जीवन और कर्मों का वर्णन | account of his life and deeds |
2भयउ राम पद नेह तव प्रसाद बायस तिलक॥ ६८ (क)॥
एआई-प्रारूप अर्थ: हे कौओं में श्रेष्ठ काकभुशुण्डि, आपकी कृपा से श्रीराम के चरणों में प्रेम हो गया।
English explanation
AI-draft meaning: O Kakabhushundi, foremost among crows, through your grace I have come to love Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | हो गया; उत्पन्न हुआ | arose; came into being |
| राम | श्रीराम के | of Lord Rama |
| पद | चरणों में | at the feet |
| नेह | प्रेम | love |
| तव | आपकी | your |
| प्रसाद | कृपा से | through grace |
| बायस | कौओं में | among crows |
| तिलक | हे श्रेष्ठ; हे गौरवस्वरूप | O foremost one; O crowning glory |
| क | पद्य-संदर्भ का चिह्न ‘क’ | verse reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- सोरठा 68 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.68
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 971, 972
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।