उत्तरकाण्ड · दोहा 67 (ख) · दोहा
निसिचर कीस लराई बरनिसि बिबिध प्रकार।
निसिचर कीस लराई बरनिसि बिबिध प्रकार।
कुंभकरन घननाद कर बल पौरुष संघार॥ ६७ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.67 · पुस्तक पृ. 970, 971
भावार्थ और शब्दार्थ
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1निसिचर कीस लराई बरनिसि बिबिध प्रकार।
राक्षसों और वानरों की लड़ाई का विविध प्रकार से वर्णन किया।
English explanation
He described the fighting between the demons and the monkeys in various ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निसिचर | राक्षसों की | of the demons |
| कीस | वानरों की | of the monkeys |
| लराई | लड़ाई | battle |
| बरनिसि | वर्णन किया | described |
| बिबिध | विविध | various |
| प्रकार | ढंगों से | in ways |
2कुंभकरन घननाद कर बल पौरुष संघार॥ ६७ (ख)॥
कुंभकर्ण और मेघनाद के बल, वीरता और उनके वध का भी वर्णन किया।
English explanation
He also described the strength, prowess, and slaying of Kumbhakarna and Meghanada.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुंभकरन | रावण के भाई कुंभकर्ण | Kumbhakarna, Ravana’s brother |
| घननाद | रावण के पुत्र मेघनाद | Meghanada, Ravana’s son |
| कर | के | of |
| बल | शक्ति | strength |
| पौरुष | वीरता | martial prowess |
| संघार | वध | slaying |
| ख | दोहा-भाग का संदर्भ-चिह्न ‘ख’ | reference marker ‘ख’ for the verse section |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 67 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.67
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 970, 971
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