उत्तरकाण्ड · दोहा 67 (क) · दोहा
सेतु बाँधि कपि सेन जिमि उतरी सागर पार।
सेतु बाँधि कपि सेन जिमि उतरी सागर पार।
गयउ बसीठी बीरबर जेहि बिधि बालिकुमार॥ ६७ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.67 · पुस्तक पृ. 970, 971
भावार्थ और शब्दार्थ
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1सेतु बाँधि कपि सेन जिमि उतरी सागर पार।
सेतु बाँधकर वानर-सेना जिस प्रकार समुद्र के पार उतरी, उसका वर्णन किया गया।
English explanation
The account described how the monkey army built a bridge and crossed to the other side of the ocean.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेतु | पुल | bridge |
| बाँधि | बनाकर | having built |
| कपि | वानरों की | of monkeys |
| सेन | सेना | army |
| जिमि | जिस प्रकार | how |
| उतरी | पार पहुँची | crossed over |
| सागर | समुद्र के | of the ocean |
| पार | दूसरे किनारे | to the other shore |
2गयउ बसीठी बीरबर जेहि बिधि बालिकुमार॥ ६७ (क)॥
और जिस प्रकार वीरश्रेष्ठ बालिपुत्र अंगद दूत बनकर गए, उसका वर्णन किया गया।
English explanation
The account also described how Angada, Bali’s son and an outstanding warrior, went as an envoy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गयउ | गए | went |
| बसीठी | दूत का कार्य करने | on an envoy’s mission |
| बीरबर | वीरों में श्रेष्ठ | foremost among warriors |
| जेहि | जिस | in which |
| बिधि | प्रकार | manner |
| बालिकुमार | बालि के पुत्र अंगद | Angada, son of Bali |
| क | दोहा-भाग का संदर्भ-चिह्न ‘क’ | reference marker ‘क’ for the verse section |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 67 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.67
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 970, 971
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