उत्तरकाण्ड · सोरठा 98 (क) · सोरठा
असुभ बेष भूषन धरें भच्छाभच्छ जे खाहिं।
मूल पाठ
असुभ बेष भूषन धरें भच्छाभच्छ जे खाहिं।
तेइ जोगी तेइ सिद्ध नर पूज्य ते कलिजुग माहिं॥ ९८ (क)॥
स्रोत अभिलेख 7.98 · पुस्तक पृ. 1000, 1000
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो अमङ्गल वेष और अमङ्गल भूषण धारण करते हैं और भक्ष्य-अभक्ष्य (खाने योग्य और न खाने योग्य) सब कुछ खा लेते हैं, वे ही योगी हैं, वे ही सिद्ध हैं और वे ही मनुष्य कलियुगमें पूज्य हैं॥ ९८ (क)॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1000 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1असुभ बेष भूषन धरें भच्छाभच्छ जे खाहिं।
English explanation
AI-draft meaning: Those who wear inauspicious attire and ornaments and eat both permitted and forbidden foods—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| असुभ | अशुभ; अमंगलकारी | inauspicious |
| बेष | वेश; पहनावा | attire; dress |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| धरें | धारण करते हैं | wear; put on |
| भच्छाभच्छ | खाने योग्य और न खाने योग्य पदार्थ | permitted and forbidden foods |
| जे | जो लोग | those who |
| खाहिं | खाते हैं | eat |
2तेइ जोगी तेइ सिद्ध नर पूज्य ते कलिजुग माहिं॥ ९८ (क)॥
English explanation
In the age of Kali, those very people are regarded as yogis, accomplished spiritual adepts, and worthy of reverence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेइ | वे ही | those very people |
| जोगी | योगी; योग-साधक | yogis; practitioners of yoga |
| तेइ | वे ही | those very people |
| सिद्ध | साधना में सिद्ध माने जाने वाले | regarded as accomplished spiritual adepts |
| नर | मनुष्य; पुरुष | people; men |
| पूज्य | पूजा या आदर के योग्य | worthy of worship or reverence |
| ते | वे | they |
| कलिजुग | कलियुग | the age of Kali |
| माहिं | में | in |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न ‘क’ | verse-reference marker “क” |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- सोरठा 98 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.98
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1000
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1000, 1000
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।