उत्तरकाण्ड · श्लोक · श्लोक
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
मूल पाठ
रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति।।9।।
स्रोत अभिलेख 7.108 · पुस्तक पृ. 1011, 1013
भावार्थ
मूल पाठ के बादभगवान् रुद्रकी स्तुतिका यह अष्टक उन शङ्करजीकी तुष्टि (प्रसन्नता) के लिये ब्राह्मणद्वारा कहा गया। जो मनुष्य इसे भक्तिपूर्वक पढ़ते हैं, उनपर भगवान् शम्भु प्रसन्न होते हैं॥ ९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1012 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
English explanation
This eight-verse hymn to Rudra was uttered by the Brahmin to please Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रुद्राष्टकमिदं | यह रुद्र शिव का अष्टक | this eight-verse hymn to Rudra, Shiva |
| प्रोक्तं | कहा गया | was uttered |
| विप्रेण | ब्राह्मण द्वारा | by the Brahmin |
| हरतोषये | शिव को प्रसन्न करने के लिए | to please Shiva |
2 ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति।।9।।
English explanation
Shambhu is gracious to those people who recite it with devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ये | जो | those who |
| पठन्ति | पढ़ते या पाठ करते हैं | read or recite |
| नरा | मनुष्य | people |
| भक्त्या | भक्ति से | with devotion |
| तेषां | उन पर | toward them |
| शम्भुः | कल्याणकारी शिव | Shiva, the beneficent Lord |
| प्रसीदति | प्रसन्न होते हैं | is gracious |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- 7.108
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1012
- सहायक विषय
- रुद्राष्टक · गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1011, 1013
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