उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
न जानामि योगं जपं नैव पूजां। नतोऽहं सदा सर्वदा शंभु तुभ्यं।।
मूल पाठ
न जानामि योगं जपं नैव पूजां। नतोऽहं सदा सर्वदा शंभु तुभ्यं।।
जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं। प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो।।
स्रोत अभिलेख 7.108 · पुस्तक पृ. 1011, 1013
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं न तो योग जानता हूँ, न जप और न पूजा ही। हे शम्भो! मैं तो सदा-सर्वदा आपको ही नमस्कार करता हूँ। हे प्रभो! बुढ़ापा तथा जन्म [मृत्यु] के दु:खसमूहोंसे जलते हुए मुझ दुखीकी दु:खसे रक्षा कीजिये। हे ईश्वर! हे शम्भो! मैं आपको नमस्कार करता हूँ॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1012 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 न जानामि योगं जपं नैव पूजां। नतोऽहं सदा सर्वदा शंभु तुभ्यं।।
English explanation
I do not know yoga, recitation, or worship. O Shambhu, I bow to you always, at all times.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| न | नहीं | not |
| जानामि | मैं जानता हूँ | I know |
| योगं | योग-साधना | the practice of yoga |
| जपं | मंत्र-जप | mantra recitation |
| नैव | और न ही | nor indeed |
| पूजां | पूजा | ritual worship |
| नतोऽहं | मैं नतमस्तक हूँ | I bow down |
| सदा | सदा | always |
| सर्वदा | हर समय | at all times |
| शंभु | हे कल्याणदाता शिव | O Shiva, giver of well-being |
| तुभ्यं | आपको | to you |
2 जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं। प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो।।
English explanation
O Lord, O sovereign Shambhu, protect me, distressed by old age, birth, and the mass of sufferings, and fallen into affliction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जरा | बुढ़ापे से | by old age |
| जन्म | जन्म से | by birth |
| दुःखौघ | दुःखों के समूह से | by the mass of sufferings |
| तातप्यमानं | संतप्त होते हुए मुझको | me, being tormented |
| प्रभो | हे प्रभु | O Lord |
| पाहि | रक्षा करें | protect |
| आपन्नमामीश | विपत्ति में पड़े मुझको, हे ईश | me in affliction, O sovereign Lord |
| शंभो | हे कल्याणकारी शिव | O Shiva, bringer of well-being |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.108
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1012
- सहायक विषय
- रुद्राष्टक · गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1011, 1013
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।