उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
न यावद् उमानाथ पादारविन्दं। भजंतीह लोके परे वा नराणां।।
मूल पाठ
न यावद् उमानाथ पादारविन्दं। भजंतीह लोके परे वा नराणां।।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं। प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं।।
स्रोत अभिलेख 7.108 · पुस्तक पृ. 1011, 1013
भावार्थ
मूल पाठ के बादजबतक पार्वतीके पति आपके चरणकमलोंको मनुष्य नहीं भजते, तबतक उन्हें न तो इहलोक और परलोकमें सुख-शान्ति मिलती है और न उनके तापोंका नाश होता है। अत: हे समस्त जीवोंके अंदर (हृदयमें) निवास करनेवाले प्रभो! प्रसन्न हूजिये॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1012 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 न यावद् उमानाथ पादारविन्दं। भजंतीह लोके परे वा नराणां।।
English explanation
Until people worship the lotus feet of Shiva, Uma's Lord, neither in this world nor in the next do they—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| न | नहीं | not |
| यावद् | जब तक | until |
| उमानाथ | उमा पार्वती के स्वामी शिव के | of Shiva, Lord of Uma, Parvati |
| पादारविन्दं | चरण-कमल | lotus feet |
| भजंतीह | यहाँ भजते हैं | worship here |
| लोके | इस लोक में | in this world |
| परे | परलोक में | in the next world |
| वा | अथवा | or |
| नराणां | मनुष्यों को | for human beings |
2 न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं। प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं।।
English explanation
—have happiness, peace, or freedom from suffering. O Lord, the abode of all beings, be gracious.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| न | नहीं | not |
| तावत्सुखं | तब तक सुख | happiness until then |
| शान्ति | शांति | peace |
| सन्तापनाशं | संताप का नाश | the ending of suffering |
| प्रसीद | कृपा करें | be gracious |
| प्रभो | हे प्रभु | O Lord |
| सर्वभूताधिवासं | सभी प्राणियों के आश्रय | the abode of all beings |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.108
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1012
- सहायक विषय
- रुद्राष्टक · गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1011, 1013
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।