उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी। सदा सज्जनान्ददाता पुरारी।।
मूल पाठ
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी। सदा सज्जनान्ददाता पुरारी।।
चिदानंदसंदोह मोहापहारी। प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।।
स्रोत अभिलेख 7.108 · पुस्तक पृ. 1011, 1013
भावार्थ
मूल पाठ के बादकलाओंसे परे, कल्याणस्वरूप, कल्पका अन्त (प्रलय) करनेवाले, सज्जनोंको सदा आनन्द देनेवाले, त्रिपुरके शत्रु, सच्चिदानन्दघन, मोहको हरनेवाले, मनको मथ डालनेवाले कामदेवके शत्रु, हे प्रभो! प्रसन्न हूजिये, प्रसन्न हूजिये॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1011 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी। सदा सज्जनान्ददाता पुरारी।।
English explanation
O Shiva, beyond finite divisions, embodying well-being, ending the cosmic age, ever giving joy to the virtuous, destroyer of the three cities!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कलातीत | कलाओं और सीमित अंशों से परे | beyond finite parts and divisions |
| कल्याण | कल्याणस्वरूप | embodying well-being |
| कल्पान्तकारी | कल्प का अंत करने वाले | the one who ends a cosmic age |
| सदा | सदा | always |
| सज्जनान्ददाता | सज्जनों को आनंद देने वाले | giver of joy to the virtuous |
| पुरारी | त्रिपुर के शत्रु शिव | Shiva, destroyer of the three cities |
2 चिदानंदसंदोह मोहापहारी। प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।।
English explanation
O Lord, fullness of consciousness and bliss, remover of delusion, Shiva, foe of the god of love: be gracious, be gracious!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चिदानंदसंदोह | चेतना और आनंद की राशि | the fullness of consciousness and bliss |
| मोहापहारी | मोह हरने वाले | remover of delusion |
| प्रसीद | कृपा करें | be gracious |
| प्रसीद | कृपा करें | be gracious |
| प्रभो | हे प्रभु | O Lord |
| मन्मथारी | कामदेव के शत्रु शिव | Shiva, foe of the god of love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.108
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1011
- सहायक विषय
- रुद्राष्टक · गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1011, 1013
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।