उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
प्रचंडं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं। अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं।।
मूल पाठ
प्रचंडं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं। अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं।।
त्रयःशूल निर्मूलनं शूलपाणिं। भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यं।।
स्रोत अभिलेख 7.108 · पुस्तक पृ. 1011, 1013
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रचण्ड (रुद्ररूप), श्रेष्ठ, तेजस्वी, परमेश्वर, अखण्ड, अजन्मा, करोड़ों सूर्योंके समान प्रकाशवाले, तीनों प्रकारके शूलों (दु:खों) को निर्मूल करनेवाले, हाथमें त्रिशूल धारण किये, भाव (प्रेम) के द्वारा प्राप्त होनेवाले भवानीके पति श्रीशङ्करजीको मैं भजता हूँ॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1011 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 प्रचंडं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं। अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं।।
English explanation
He is mighty, supreme, fearless, the highest Lord, undivided, unborn, and radiant like tens of millions of suns.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रचंडं | प्रचंड को | the mighty, fierce one |
| प्रकृष्टं | सर्वोत्कृष्ट को | the supremely excellent one |
| प्रगल्भं | निर्भीक और समर्थ को | the fearless and powerful one |
| परेशं | परमेश्वर को | the supreme Lord |
| अखंडं | अखंड को | the undivided one |
| अजं | अजन्मा को | the unborn one |
| भानुकोटिप्रकाशं | करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाशमान को | the one radiant like tens of millions of suns |
2 त्रयःशूल निर्मूलनं शूलपाणिं। भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यं।।
English explanation
I worship Shiva, who uproots the three kinds of suffering, bears the trident, is Bhavani's husband, and is approached through heartfelt devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| त्रयःशूल | तीन प्रकार के तापों का | of the three kinds of suffering |
| निर्मूलनं | जड़ से नाश करने वाले को | the one who uproots |
| शूलपाणिं | हाथ में त्रिशूल धारण करने वाले को | the trident-bearing one |
| भजेऽहं | मैं भजता हूँ | I worship |
| भवानीपतिं | भवानी पार्वती के पति को | the husband of Bhavani, Parvati |
| भावगम्यं | भक्ति-भाव से प्राप्त होने वाले को | the one accessible through heartfelt devotion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.108
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1011
- सहायक विषय
- रुद्राष्टक · गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1011, 1013
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।