उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
चलत्कुंडलं भ्रू सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालं।।
मूल पाठ
चलत्कुंडलं भ्रू सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालं।।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं। प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि।।
स्रोत अभिलेख 7.108 · पुस्तक पृ. 1011, 1013
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिनके कानोंमें कुण्डल हिल रहे हैं, सुन्दर भ्रुकुटी और विशाल नेत्र हैं; जो प्रसन्नमुख, नीलकण्ठ और दयालु हैं; सिंहचर्मका वस्त्र धारण किये और मुण्डमाला पहने हैं; उन सबके प्यारे और सबके नाथ [कल्याण करनेवाले] श्रीशङ्करजीको मैं भजता हूँ॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1011 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 चलत्कुंडलं भ्रू सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालं।।
English explanation
His earrings sway; he has brows and beautiful, large eyes. His face is serene, his throat blue, and he is compassionate.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चलत्कुंडलं | हिलते कुंडलों वाले को | the one with swaying earrings |
| भ्रू | भौंहें | brows |
| सुनेत्रं | सुंदर नेत्रों वाले को | the one with beautiful eyes |
| विशालं | विशाल | large and expansive |
| प्रसन्नाननं | प्रसन्न मुख वाले को | the one with a serene face |
| नीलकंठं | नीले कंठ वाले शिव को | Shiva, the blue-throated one |
| दयालं | दयालु को | the compassionate one |
2 मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं। प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि।।
English explanation
I worship beloved Shankara, the beneficent Lord of all, clothed in the hide of the king of beasts and wearing a garland of skulls.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मृगाधीशचर्माम्बरं | पशुराज की खाल का वस्त्र पहनने वाले को | the one clothed in the hide of the king of beasts |
| मुण्डमालं | मुंडों की माला पहनने वाले को | the one wearing a garland of skulls |
| प्रियं | प्रिय को | the beloved one |
| शंकरं | कल्याणकारी शिव को | Shiva, the bringer of well-being |
| सर्वनाथं | सबके स्वामी को | the Lord of all |
| भजामि | मैं भजता हूँ | I worship |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.108
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1011
- सहायक विषय
- रुद्राष्टक · गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1011, 1013
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।