उत्तरकाण्ड · श्लोक · श्लोक
यत्पूर्वं प्रभुणा कृतं सुकविना श्रीशम्भुना दुर्गमं
मूल पाठ
यत्पूर्वं प्रभुणा कृतं सुकविना श्रीशम्भुना दुर्गमं
श्रॆमद्रामपदाब्जभक्तिमनिशम प्राप्त्यै तू रामायणं।
मत्वा तद्रघुनाथनामनिरतम स्वान्तस्तम:शान्तये
भाषाबद्ध्मिदम चकार तुलसीदासस्तथा मानसं।।1।।
स्रोत अभिलेख 7.13 · पुस्तक पृ. 1044, 1047
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रेष्ठ कवि भगवान् श्रीशंकरजीने पहले जिस दुर्गम मानस-रामायणकी, श्रीरामजीके चरणकमलोंमें नित्य-निरन्तर [अनन्य] भक्ति प्राप्त होनेके लिये, रचना की थी, उस मानस-रामायणको श्रीरघुनाथजीके नाममें निरत मानकर अपने अन्त:करणके अन्धकारको मिटानेके लिये तुलसीदासने इस मानसके रूपमें भाषाबद्ध किया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1046 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1यत्पूर्वं प्रभुणा कृतं सुकविना श्रीशम्भुना दुर्गमं
English explanation
The profound Ramayana that was formerly composed by Lord Shiva, the excellent poet—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यत्पूर्वं | जो पहले | which formerly |
| प्रभुणा | प्रभु द्वारा | by the Lord |
| कृतं | रची गई | composed |
| सुकविना | श्रेष्ठ कवि द्वारा | by the excellent poet |
| श्रीशम्भुना | श्री शिव द्वारा | by venerable Shiva |
| दुर्गमं | दुर्गम, गूढ़ | profound, difficult to fathom |
2श्रॆमद्रामपदाब्जभक्तिमनिशम प्राप्त्यै तू रामायणं।
English explanation
That Ramayana was composed for attaining ceaseless devotion to the lotus feet of glorious Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रॆमद्रामपदाब्जभक्तिमनिशम | श्री राम के चरणकमलों में भक्ति, निरंतर | devotion to glorious Rama’s lotus feet, ceaselessly |
| प्राप्त्यै | प्राप्ति के लिए | for attaining |
| तू | तो, निश्चय ही | indeed, however |
| रामायणं | रामायण | the Ramayana |
3मत्वा तद्रघुनाथनामनिरतम स्वान्तस्तम:शान्तये
English explanation
Having reflected on it, absorbed in Raghunatha’s name, to dispel the darkness of his own heart—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मत्वा | विचार करके | having considered |
| तद्रघुनाथनामनिरतम | उसको; रघुनाथ के नाम में लीन | that; absorbed in Raghunatha’s name |
| स्वान्तस्तम | अपने हृदय का अंधकार | darkness of one’s own heart |
| शान्तये | शमन के लिए | for pacifying |
4भाषाबद्ध्मिदम चकार तुलसीदासस्तथा मानसं।।1।।
English explanation
Tulsidas accordingly composed this Manas in the vernacular.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भाषाबद्ध्मिदम | लोकभाषा में बँधा यह | this, composed in the vernacular |
| चकार | रचा | composed |
| तुलसीदासस्तथा | तुलसीदास ने उसी प्रकार | Tulsidas accordingly |
| मानसं | मानस काव्य | the Manas |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- 7.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1046
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1044, 1047
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।