उत्तरकाण्ड · श्लोक · श्लोक
पुण्यं पापहरं सदा शिवकरं विज्ञानाभाक्तिप्रदम
मूल पाठ
पुण्यं पापहरं सदा शिवकरं विज्ञानाभाक्तिप्रदम
मायामोहमलापहं सुविमलं प्रेमाम्बुपूरं शुभम।
श्रॆमद्रामचरितमानसमिदम भक्त्यावगाहन्ति ये
ते सन्सारपतनगघोरकिरनैर्दह्यन्ति नो मानवाः।।2।।
स्रोत अभिलेख 7.13 · पुस्तक पृ. 1044, 1047
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह श्रीरामचरितमानस पुण्यरूप, पापोंका हरण करनेवाला, सदा कल्याणकारी, विज्ञान और भक्तिको देनेवाला, माया, मोह और मलका नाश करनेवाला, परम निर्मल प्रेमरूपी जलसे परिपूर्ण तथा मंगलमय है। जो मनुष्य भक्तिपूर्वक इस मानससरोवरमें गोता लगाते हैं, वे संसाररूपी सूर्यकी अति प्रचण्ड किरणोंसे नहीं जलते॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1046 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1पुण्यं पापहरं सदा शिवकरं विज्ञानाभाक्तिप्रदम
English explanation
It is holy, removes sin, always brings well-being, and bestows realized knowledge and devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुण्यं | पवित्र, पुण्यदायक | holy, meritorious |
| पापहरं | पाप मिटाने वाला | removing sin |
| सदा | सदा | always |
| शिवकरं | कल्याण करने वाला | bringing well-being |
| विज्ञानाभाक्तिप्रदम | अनुभूत ज्ञान और भक्ति देने वाला | bestowing realized knowledge and devotion |
2मायामोहमलापहं सुविमलं प्रेमाम्बुपूरं शुभम।
English explanation
It removes the impurity of illusion and delusion, is utterly pure, filled with the water of love, and auspicious.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मायामोहमलापहं | माया-मोह की मलिनता हटाने वाला | removing the impurity of illusion and delusion |
| सुविमलं | अत्यंत निर्मल | utterly pure |
| प्रेमाम्बुपूरं | प्रेमरूपी जल से भरा | filled with the water of love |
| शुभम | मंगलमय | auspicious |
3श्रॆमद्रामचरितमानसमिदम भक्त्यावगाहन्ति ये
English explanation
Those who immerse themselves with devotion in this glorious Ramcharitmanas—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रॆमद्रामचरितमानसमिदम | यह श्री रामचरितमानस | this glorious Ramcharitmanas |
| भक्त्यावगाहन्ति | भक्ति से अवगाहन करते हैं | immerse themselves with devotion |
| ये | जो लोग | those who |
4ते सन्सारपतनगघोरकिरनैर्दह्यन्ति नो मानवाः।।2।।
English explanation
Those people are not scorched by the fierce rays of the sun of worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | those |
| सन्सारपतनगघोरकिरनैर्दह्यन्ति | संसाररूपी सूर्य की भयंकर किरणों से जलते हैं | are scorched by the fierce rays of the sun of worldly existence |
| नो | नहीं | not |
| मानवाः | मनुष्य | people |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- श्लोक
- स्रोत अभिलेख
- 7.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1046
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1044, 1047
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।