उत्तरकाण्ड · दोहा 94 (ख) · दोहा
प्रभु तव आश्रम आएँ मोर मोह भ्रम भाग।
प्रभु तव आश्रम आएँ मोर मोह भ्रम भाग।
कारन कवन सो नाथ सब कहहु सहित अनुराग॥ ९४ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.94 · पुस्तक पृ. 996, 996
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1प्रभु तव आश्रम आएँ मोर मोह भ्रम भाग।
हे प्रभु, आपके आश्रम में आने पर मेरा मोह और भ्रम दूर हो गए।
English explanation
O master, upon coming to your hermitage, my delusion and confusion disappeared.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | हे प्रभु | O master |
| तव | आपके | your |
| आश्रम | आश्रम में | to the hermitage |
| आएँ | आने पर | upon coming |
| मोर | मेरा | my |
| मोह | मोह; अज्ञानजनित आसक्ति | delusion; attachment born of ignorance |
| भ्रम | भ्रम; संशय | confusion; doubt |
| भाग | दूर हो गए | disappeared |
2कारन कवन सो नाथ सब कहहु सहित अनुराग॥ ९४ (ख)॥
हे नाथ, इसका क्या कारण है? वह सब प्रेमपूर्वक बताइए।
English explanation
O master, what is the reason for this? Please explain it all with affection. (Verse reference 94, part ख.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कारन | कारण | reason |
| कवन | क्या | what |
| सो | वह; उस कारण का विवरण | that; the account of that reason |
| नाथ | हे नाथ | O master |
| सब | सब; पूरा विवरण | all; the full account |
| कहहु | बताइए | please tell |
| सहित | के साथ | with |
| अनुराग | प्रेम; स्नेह | love; affection |
| ख | पद-संदर्भ का चिह्न (ख) | verse-reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 94 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.94
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 996, 996
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।