उत्तरकाण्ड · दोहा 104 (ख) · दोहा
तेहिं कलिकाल बरष बहु बसेउँ अवध बिहगेस।
तेहिं कलिकाल बरष बहु बसेउँ अवध बिहगेस।
परेउ दुकाल बिपति बस तब मैं गयउँ बिदेस॥ १०४ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.104 · पुस्तक पृ. 1006, 1007
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1तेहिं कलिकाल बरष बहु बसेउँ अवध बिहगेस।
एआई-प्रारूप: हे पक्षिराज गरुड़! उस कलिकाल में मैं बहुत वर्षों तक अवध में रहा।
English explanation
AI draft: O Garuda, king of birds, in that age of Kali I lived in Ayodhya for many years.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तेहिं | उस | in that |
| कलिकाल | कलियुग में | age of Kali |
| बरष | वर्ष | years |
| बहु | बहुत | many |
| बसेउँ | मैं रहा | I lived |
| अवध | अवध अर्थात अयोध्या में | in Ayodhya |
| बिहगेस | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
2परेउ दुकाल बिपति बस तब मैं गयउँ बिदेस॥ १०४ (ख)॥
एआई-प्रारूप: अकाल पड़ा; तब विपत्ति से विवश होकर मैं दूसरे देश चला गया।
English explanation
AI draft: A famine struck; then, driven by hardship, I went to another land.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परेउ | पड़ा | struck; occurred |
| दुकाल | अकाल | famine |
| बिपति | विपत्ति के | of hardship |
| बस | वश में; विवश होकर | under its sway; compelled |
| तब | तब | then |
| मैं | मैं | I |
| गयउँ | चला गया | went |
| बिदेस | दूसरे देश में | to another land |
| ख | दोहा १०४ के दूसरे भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the second part of couplet 104 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 104 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.104
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1006, 1007
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।