उत्तरकाण्ड · दोहा · दोहा
कौसल्यादि मातु सब मन अनंद अस होइ।
मूल पाठ
कौसल्यादि मातु सब मन अनंद अस होइ।
आयउ प्रभु श्री अनुजजुत कहन चहत अब कोइ॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 905, 906
भावार्थ
मूल पाठ के बादकौसल्या आदि सब माताओंके मनमें ऐसा आनन्द हो रहा है जैसे अभी कोई कहना ही चाहता है कि सीताजी और लक्ष्मणजीसहित प्रभु श्रीरामचन्द्रजी आ गये।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 906 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1कौसल्यादि मातु सब मन अनंद अस होइ।
English explanation
Such joy arose in the hearts of all the mothers, including Kaushalya—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौसल्यादि | कौसल्या और अन्य | Kaushalya and the others |
| मातु | माताएँ | mothers |
| सब | सभी | all |
| मन | मन में | in their hearts |
| अनंद | आनंद | joy |
| अस | ऐसा | such |
| होइ | होता है | arises |
2आयउ प्रभु श्री अनुजजुत कहन चहत अब कोइ॥
English explanation
As though someone were now about to say, ‘Lord Rama has arrived with Sita and his younger brother Lakshmana.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आयउ | आ गए हैं | has arrived |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| श्री | सीता | Sita, Rama's wife |
| अनुजजुत | छोटे भाई लक्ष्मण सहित | accompanied by his younger brother Lakshmana |
| कहन | कहना | to say |
| चहत | चाहता है; कहने को है | wishes to; is about to say |
| अब | अब | now |
| कोइ | कोई | someone |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 906
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 905, 906
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