उत्तरकाण्ड · दोहा 4 (क) · दोहा
आवत देखि लोग सब कृपासिंधु भगवान।
आवत देखि लोग सब कृपासिंधु भगवान।
नगर निकट प्रभु प्रेरेउ उतरेउ भूमि बिमान॥ ४ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.4 · पुस्तक पृ. 910, 911
भावार्थ और शब्दार्थ
1आवत देखि लोग सब कृपासिंधु भगवान।
एआई प्रारूप अर्थ: सब लोगों को आते देखकर कृपा के सागर भगवान राम ने अगले चरण में वर्णित निर्देश दिया।
English explanation
AI draft meaning: Seeing all the people approaching, Lord Rama, the ocean of compassion, gave the direction described in the next line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आवत | आते हुए | approaching |
| देखि | देखकर | having seen |
| लोग | लोगों को | the people |
| सब | सभी | all |
| कृपासिंधु | कृपा के सागर | ocean of compassion |
| भगवान | भगवान राम | Lord Rama |
2नगर निकट प्रभु प्रेरेउ उतरेउ भूमि बिमान॥ ४ (क)॥
एआई प्रारूप अर्थ: नगर के निकट प्रभु राम ने विमान को उतरने का निर्देश दिया, और विमान भूमि पर उतर आया। (४-क संदर्भ-चिह्न है।)
English explanation
AI draft meaning: Near the city, Lord Rama directed the aerial chariot to descend, and it landed on the ground. (4-ka is a reference marker.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नगर | नगर के | the city |
| निकट | निकट | near |
| प्रभु | स्वामी राम ने | Lord Rama |
| प्रेरेउ | निर्देश दिया | directed it |
| उतरेउ | उतर आया | descended |
| भूमि | भूमि पर | onto the ground |
| बिमान | पुष्पक विमान | the Pushpaka aerial chariot |
| क | उपखंड का संदर्भ-चिह्न ‘क’ | subsection reference marker ‘ka’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 4 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.4
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 910, 911
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।