उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
ससुरारि पिआरि लगी जब तें। रिपरूप कुटुंब भए तब तें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजबसे ससुराल प्यारी लगने लगी, तबसे कुटुम्बी शत्रुरूप हो गये। राजा लोग पापपरायण हो गये, उनमें धर्म नहीं रहा। वे प्रजाको नित्य ही [बिना अपराध] दण्ड देकर उसकी विडम्बना (दुर्दशा) किया करते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1003 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
ससुरारि पिआरि लगी जब तें। रिपरूप कुटुंब भए तब तें।।
नृप पाप परायन धर्म नहीं। करि दंड बिडंब प्रजा नितहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.101 · पुस्तक पृ. 1003, 1003
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ससुरारि पिआरि लगी जब तें। रिपरूप कुटुंब भए तब तें।।
English explanation
From the time the in-laws' home became dear, one's own family came to seem like enemies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ससुरारि | ससुराल | in-laws' home |
| पिआरि | प्रिय | dear |
| लगी | लगने लगी | came to seem |
| जब | जब | when |
| तें | से | from |
| रिपरूप | शत्रु जैसे | like enemies |
| कुटुंब | अपने परिवार के लोग | one's own family |
| भए | हो गए | became |
| तब | तब | then |
| तें | से | from |
2 नृप पाप परायन धर्म नहीं। करि दंड बिडंब प्रजा नितहीं।।
English explanation
Rulers are devoted to wrongdoing, not righteousness; they continually torment their subjects through punishment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नृप | राजा | rulers |
| पाप | पाप में | to wrongdoing |
| परायन | लगे हुए | devoted |
| धर्म | धर्माचरण | righteous conduct |
| नहीं | नहीं | not |
| करि | करके; देकर | by imposing |
| दंड | दंड | punishment |
| बिडंब | सताते हैं | torment |
| प्रजा | प्रजा को | their subjects |
| नितहीं | नित्य ही | continually |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.101
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1003
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1003, 1003
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।