उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
कुलवंति निकारहिं नारि सती। गृह आनिहिं चेरी निबेरि गती।।
मूल पाठ
कुलवंति निकारहिं नारि सती। गृह आनिहिं चेरी निबेरि गती।।
सुत मानहिं मातु पिता तब लौं। अबलानन दीख नहीं जब लौं।।
स्रोत अभिलेख 7.101 · पुस्तक पृ. 1003, 1003
भावार्थ
मूल पाठ के बादकुलवती और सती स्त्रीको पुरुष घरसे निकाल देते हैं और अच्छी चालको छोड़कर घरमें दासीको ला रखते हैं। पुत्र अपने माता-पिताको तभीतक मानते हैं जबतक स्त्रीका मुँह नहीं दिखायी पड़ा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1003 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कुलवंति निकारहिं नारि सती। गृह आनिहिं चेरी निबेरि गती।।
English explanation
People turn out wives of respectable families who are faithful to them, and bring maidservants into their homes, settling their place there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुलवंति | अच्छे कुल की | of respectable family |
| निकारहिं | निकाल देते हैं | turn out |
| नारि | स्त्री; पत्नी | woman; wife |
| सती | पतिव्रता | faithful to her husband |
| गृह | घर में | into the home |
| आनिहिं | ले आते हैं | bring |
| चेरी | दासी | maidservant |
| निबेरि | निश्चित करके | having settled |
| गती | स्थिति; व्यवस्था | status; arrangement |
2 सुत मानहिं मातु पिता तब लौं। अबलानन दीख नहीं जब लौं।।
English explanation
Sons respect their parents only until they have seen a woman's face.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुत | पुत्र | sons |
| मानहिं | आदर करते हैं | respect |
| मातु | माता | mother |
| पिता | पिता | father |
| तब | तब | then |
| लौं | तक | up to |
| अबलानन | स्त्री का मुख | a woman's face |
| दीख | देखा | seen |
| नहीं | नहीं | not |
| जब | जब | when |
| लौं | तक | until |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.101
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1003
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1003, 1003
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।