उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
धनवंत कुलीन मलीन अपी। द्विज चिन्ह जनेउ उघार तपी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दधनी लोग मलिन (नीच जातिके) होनेपर भी कुलीन माने जाते हैं। द्विजका चिह्न जनेऊमात्र रह गया और नंगे बदन रहना तपस्वीका। जो वेदों और पुराणोंको नहीं मानते, कलियुगमें वे ही हरिभक्त और सच्चे संत कहलाते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1003 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
धनवंत कुलीन मलीन अपी। द्विज चिन्ह जनेउ उघार तपी।।
नहिं मान पुरान न बेदहि जो। हरि सेवक संत सही कलि सो।।
स्रोत अभिलेख 7.101 · पुस्तक पृ. 1003, 1003
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 धनवंत कुलीन मलीन अपी। द्विज चिन्ह जनेउ उघार तपी।।
English explanation
A wealthy person is regarded as noble even if morally impure. The sacred thread alone marks a twice-born person, and going unclothed marks an ascetic.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धनवंत | धनवान व्यक्ति | a wealthy person |
| कुलीन | कुलीन माना जाता है | is considered noble |
| मलीन | मलिन आचरण वाला | morally impure |
| अपी | भी; होने पर भी | even; even if |
| द्विज | द्विज का | of a twice-born person |
| चिन्ह | पहचान का चिह्न | identifying mark |
| जनेउ | यज्ञोपवीत; जनेऊ | sacred thread |
| उघार | नंगा; वस्त्रहीन | unclothed |
| तपी | तपस्वी माना जाता है | is considered an ascetic |
2 नहिं मान पुरान न बेदहि जो। हरि सेवक संत सही कलि सो।।
English explanation
In the age of Kali, one who acknowledges neither the Puranas nor the Vedas is regarded as a true servant of God and a saint.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नहिं | नहीं | not |
| मान | मानता है | acknowledges |
| पुरान | पुराणों को | the Puranas |
| न | न ही | nor |
| बेदहि | वेदों को | the Vedas |
| जो | जो व्यक्ति | the person who |
| हरि | भगवान हरि का | of God, Hari |
| सेवक | सेवक | servant |
| संत | संत | saint |
| सही | सच्चा | true |
| कलि | कलियुग में | in the age of Kali |
| सो | वही | that very person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.101
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1003
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1003, 1003
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।