उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
कबि बृंद उदार दुनी न सुनी। गुन दूषक ब्रात न कोपि गुनी।।
मूल पाठ
कबि बृंद उदार दुनी न सुनी। गुन दूषक ब्रात न कोपि गुनी।।
कलि बारहिं बार दुकाल परै। बिनु अन्न दुखी सब लोग मरै।।
स्रोत अभिलेख 7.101 · पुस्तक पृ. 1003, 1003
भावार्थ
मूल पाठ के बादकवियोंके तो झुंड हो गये, पर दुनियामें उदार (कवियोंंका आश्रयदाता) सुनायी नहीं पड़ता। गुणमें दोष लगानेवाले बहुत हैं, पर गुणी कोई भी नहीं है। कलियुगमें बार-बार अकाल पड़ते हैं। अन्नके बिना सब लोग दुखी होकर मरते हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1003 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कबि बृंद उदार दुनी न सुनी। गुन दूषक ब्रात न कोपि गुनी।।
English explanation
There are hosts of poets, but generous poets are unheard of in the world. Crowds disparage virtue, but no virtuous person is found—the latter reading depends on the uncertain token ‘कोपि’.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबि | कवि | poets |
| बृंद | समूह | hosts |
| उदार | उदार; विशालहृदय | generous; noble-hearted |
| दुनी | दुनिया में | in the world |
| न | नहीं | not |
| सुनी | सुनने में आते | are heard of |
| गुन | गुणों के | of virtues |
| दूषक | निंदक | disparagers |
| ब्रात | झुंड; समूह | crowds; hosts |
| न | नहीं | not |
| कोपि | कोई; ‘न कोपि गुनी’ में कोई भी गुणी नहीं। | Anyone; in ‘न कोपि गुनी,’ no virtuous person. |
| गुनी | गुणवान व्यक्ति | a virtuous person |
2 कलि बारहिं बार दुकाल परै। बिनु अन्न दुखी सब लोग मरै।।
English explanation
In the age of Kali, famine strikes repeatedly. Without food, all people suffer and die.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कलि | कलियुग में | in the age of Kali |
| बारहिं | बार ही | time after |
| बार | बार | time |
| दुकाल | अकाल | famine |
| परै | पड़ता है | strikes |
| बिनु | बिना | without |
| अन्न | अन्न; भोजन | grain; food |
| दुखी | दुखी होकर | in suffering |
| सब | सभी | all |
| लोग | लोग | people |
| मरै | मरते हैं | die |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.101
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1003
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1003, 1003
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।