उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
रघुबंस भूषन चरित यह नर कहहिं सुनहिं जे गावहीं।
मूल पाठ
रघुबंस भूषन चरित यह नर कहहिं सुनहिं जे गावहीं।
कलि मल मनोमल धोइ बिनु श्रम राम धाम सिधावहीं।।
सत पंच चौपाईं मनोहर जानि जो नर उर धरै।
दारुन अबिद्या पंच जनित बिकार श्रीरघुबर हरै।।2।।
स्रोत अभिलेख 7.13 · पुस्तक पृ. 1044, 1047
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो मनुष्य रघुवंशके भूषण श्रीरामजीका यह चरित्र कहते हैं, सुनते हैं और गाते हैं, वे कलियुगके पाप और मनके मलको धोकर बिना ही परिश्रम श्रीरामजीके परम धामको चले जाते हैं। [अधिक क्या] जो मनुष्य पाँच-सात चौपाइयोंको भी मनोहर जानकर [अथवा रामायणकी चौपाइयोंको श्रेष्ठ पंच (कर्तव्याकर्तव्यका सच्चा निर्णायक) जानकर उनको] हृदयमें धारण कर लेता है, उसके भी पाँच प्रकारकी अविद्याओंसे उत्पन्न विकारोंको श्रीरामजी हरण कर लेते हैं। (अर्थात् सारे रामचरित्रकी तो बात ही क्या है, जो पाँच-सात चौपाइयोंको भी समझकर उनका अर्थ हृदयमें धारण कर लेते हैं, उनके भी अविद्याजनित सारे क्लेश श्रीरामचन्द्रजी हर लेते हैं)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1045 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रघुबंस भूषन चरित यह नर कहहिं सुनहिं जे गावहीं।
English explanation
Those who recount, hear, and sing this account of Rama, ornament of Raghu’s lineage—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुबंस | रघु के वंश का | of Raghu’s lineage |
| भूषन | भूषण, शोभा राम | ornament, Rama |
| चरित | चरित | account of deeds |
| यह | यह | this |
| नर | लोग | people |
| कहहिं | कहते हैं | recount |
| सुनहिं | सुनते हैं | hear |
| जे | जो | who |
| गावहीं | गाते हैं | sing |
2 कलि मल मनोमल धोइ बिनु श्रम राम धाम सिधावहीं।।
English explanation
They wash away the impurities of Kali and of the mind and reach Rama’s abode without toil.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कलि | कलियुग की | of the age of Kali |
| मल | मलिनता | impurity |
| मनोमल | मन की मलिनता | mental impurity |
| धोइ | धोकर | washing away |
| बिनु | बिना | without |
| श्रम | परिश्रम | toil |
| राम | राम के | Rama’s |
| धाम | धाम | abode |
| सिधावहीं | जाते हैं | go to |
3 सत पंच चौपाईं मनोहर जानि जो नर उर धरै।
English explanation
Whoever recognizes these lovely verses as five excellent chaupais and holds them in the heart—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सत | सत्, उत्तम | good, excellent |
| पंच | पाँच | five |
| चौपाईं | चौपाइयाँ | chaupai verses |
| मनोहर | मनोहर | lovely |
| जानि | जानकर | recognizing |
| जो | जो | whoever |
| नर | व्यक्ति | person |
| उर | हृदय में | in the heart |
| धरै | धारण करता है | holds |
4 दारुन अबिद्या पंच जनित बिकार श्रीरघुबर हरै।।2।।
English explanation
Sri Rama removes that person’s terrible ignorance and the five disorders arising from it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दारुन | भयंकर | terrible |
| अबिद्या | अविद्या, अज्ञान | spiritual ignorance |
| पंच | पाँच | five |
| जनित | उत्पन्न | arising |
| बिकार | विकार | disorders, afflictions |
| श्रीरघुबर | श्री राम, रघुकुल में श्रेष्ठ | Sri Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| हरै | हर लेते हैं | removes |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1045
- सहायक विषय
- रामायण-माहात्म्य, तुलसी-विनय और फलस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 1044, 1047
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।