उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
मुनि मानस पंकज भृंग भजे। रघुबीर महा रनधीर अजे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे मुनियोंके मनरूपी कमलके भ्रमर! हे महान् रणधीर एवं अजेय श्रीरघुवीर! मैं आपको भजता हूँ (आपकी शरण ग्रहण करता हूँ)। हे हरि! आपका नाम जपता हूँ और आपको नमस्कार करता हूँ। आप जन्म-मरणरूपी रोगकी महान् औषध और अभिमानके शत्रु हैं॥ ९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 924 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मुनि मानस पंकज भृंग भजे। रघुबीर महा रनधीर अजे।।
तव नाम जपामि नमामि हरी। भव रोग महागद मान अरी।।9।।
स्रोत अभिलेख 7.14 · पुस्तक पृ. 923, 924
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मुनि मानस पंकज भृंग भजे। रघुबीर महा रनधीर अजे।।
English explanation
I worship Rama, hero of Raghu’s line, the bee of the sages’ heart-lotuses, mighty and steadfast in battle, and unborn.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनियों के | of sages |
| मानस | हृदय | heart |
| पंकज | कमल | lotus |
| भृंग | भौंरे रूपी प्रभु | the Lord as a bee |
| भजे | मैं भजता हूँ | I worship |
| रघुबीर | रघुकुल के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s line |
| महा | महान | great |
| रनधीर | युद्ध में धीर और वीर | steadfast and valiant in battle |
| अजे | अजन्मा | unborn |
2 तव नाम जपामि नमामि हरी। भव रोग महागद मान अरी।।9।।
English explanation
O Hari, I repeat your name and bow to you. You are the great medicine for the disease of worldly existence and the foe of pride.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तव | आपका | your |
| नाम | नाम | name |
| जपामि | मैं जपता हूँ | I repeat in prayer |
| नमामि | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow |
| हरी | हे हरि | O Hari |
| भव | संसार रूपी | of worldly existence |
| रोग | रोग | disease |
| महागद | महान औषधि | great medicine |
| मान | अभिमान के | of pride |
| अरी | शत्रु | foe |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 924
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 923, 924
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।