उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
करि प्रेम निरंतर नेम लिएँ। पद पंकज सेवत सुद्ध हिएँ।।
मूल पाठ
करि प्रेम निरंतर नेम लिएँ। पद पंकज सेवत सुद्ध हिएँ।।
सम मानि निरादर आदरही। सब संत सुखी बिचरंति मही।।8।।
स्रोत अभिलेख 7.14 · पुस्तक पृ. 923, 924
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे प्रेमपूर्वक नियम लेकर निरन्तर शुद्ध हृदयसे आपके चरणकमलोंकी सेवा करते रहते हैं और निरादर और आदरको समान मानकर वे सब संत सुखी होकर पृथ्वीपर विचरते हैं॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 924 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 करि प्रेम निरंतर नेम लिएँ। पद पंकज सेवत सुद्ध हिएँ।।
English explanation
With love and constant observance of their discipline, they serve your lotus feet with pure hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having cultivated |
| प्रेम | प्रेम | love |
| निरंतर | लगातार | continually |
| नेम | नियम | discipline |
| लिएँ | अपनाए हुए | having undertaken |
| पद | आपके चरण | your feet |
| पंकज | कमल रूपी | lotus-like |
| सेवत | सेवा करते हैं | serve |
| सुद्ध | शुद्ध | pure |
| हिएँ | हृदय से | with hearts |
2 सम मानि निरादर आदरही। सब संत सुखी बिचरंति मही।।8।।
English explanation
Regarding dishonor and honor alike, all the saints wander happily upon the earth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सम | समान | equal |
| मानि | मानकर | regarding |
| निरादर | अनादर | dishonor |
| आदरही | आदर को भी | honor as well |
| सब | सभी | all |
| संत | संत | saints |
| सुखी | सुखी होकर | happily |
| बिचरंति | विचरते हैं | wander |
| मही | पृथ्वी पर | upon the earth |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 924
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 923, 924
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।