उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
नहिं राग न लोभ न मान मदा।।तिन्ह कें सम बैभव वा बिपदा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउनमें न राग (आसक्ति) है, न लोभ; न मान है, न मद। उनको सम्पत्ति (सुख) और विपत्ति (दु:ख) समान है। इसीसे मुनिलोग योग (साधन) का भरोसा सदाके लिये त्याग देते हैं और प्रसन्नताके साथ आपके सेवक बन जाते हैं॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 924 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नहिं राग न लोभ न मान मदा।।तिन्ह कें सम बैभव वा बिपदा।।
एहि ते तव सेवक होत मुदा। मुनि त्यागत जोग भरोस सदा।।7।।
स्रोत अभिलेख 7.14 · पुस्तक पृ. 923, 924
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नहिं राग न लोभ न मान मदा।।तिन्ह कें सम बैभव वा बिपदा।।
English explanation
They have no attachment, greed, pride, or arrogance; prosperity and adversity are equal to them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नहिं | नहीं है | there is no |
| राग | आसक्ति | attachment |
| न | न | no |
| लोभ | लोभ | greed |
| न | न | no |
| मान | अभिमान | pride |
| मदा | अहंकार का मद | arrogance |
| तिन्ह | उन | them |
| कें | के लिए | for |
| सम | समान | equal |
| बैभव | समृद्धि | prosperity |
| वा | या | or |
| बिपदा | विपत्ति | adversity |
2 एहि ते तव सेवक होत मुदा। मुनि त्यागत जोग भरोस सदा।।7।।
English explanation
For this reason, sages abandon reliance on yoga and ever joyfully become your servants.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इसी | this very |
| ते | कारण से | because of |
| तव | आपके | your |
| सेवक | सेवक | servants |
| होत | बनते हैं | become |
| मुदा | आनंद से | joyfully |
| मुनि | मुनिजन | sages |
| त्यागत | त्यागते हैं | abandon |
| जोग | योग का | on yoga |
| भरोस | भरोसा | reliance |
| सदा | सदा | always |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 924
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 923, 924
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।