उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
महि मंडल मंडन चारुतरं। धृत सायक चाप निषंग बरं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआप पृथ्वीमण्डलके अत्यन्त सुन्दर आभूषण हैं; आप श्रेष्ठ बाण, धनुष और तरकस धारण किये हुए हैं। महान् मद, मोह और ममतारूपी रात्रिके अन्धकारसमूहके नाश करनेके लिये आप सूर्यके तेजोमय किरणसमूह हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 923 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
महि मंडल मंडन चारुतरं। धृत सायक चाप निषंग बरं।।
मद मोह महा ममता रजनी। तम पुंज दिवाकर तेज अनी।।3।।
स्रोत अभिलेख 7.14 · पुस्तक पृ. 923, 924
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 महि मंडल मंडन चारुतरं। धृत सायक चाप निषंग बरं।।
English explanation
You are the supremely beautiful ornament of the earth, bearing excellent arrows, bow, and quiver.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महि | पृथ्वी | earth |
| मंडल | मंडल | realm |
| मंडन | आभूषण | ornament |
| चारुतरं | अत्यंत सुंदर | exceedingly beautiful |
| धृत | धारण किए हुए | bearing |
| सायक | बाण | arrows |
| चाप | धनुष | bow |
| निषंग | तरकश | quiver |
| बरं | उत्तम | excellent |
2 मद मोह महा ममता रजनी। तम पुंज दिवाकर तेज अनी।।3।।
English explanation
You are the sun with its array of brilliant rays, dispelling the mass of darkness that is the night of arrogance, delusion, and deep possessiveness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मद | अहंकार का नशा | arrogance |
| मोह | मोह | delusion |
| महा | प्रबल | great |
| ममता | मेरा होने का आसक्त भाव | possessive attachment |
| रजनी | रात्रि | night |
| तम | अंधकार | darkness |
| पुंज | समूह | mass |
| दिवाकर | सूर्य | sun |
| तेज | प्रकाशमय तेज | radiance |
| अनी | किरणों का समूह | array of rays |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 923
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 923, 924
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।