उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
दससीस बिनासन बीस भुजा। कृत दूरि महा महि भूरि रुजा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे दस सिर और बीस भुजाओंवाले रावणका विनाश करके पृथ्वीके सब महान् रोगों (कष्टों)को दूर करनेवाले श्रीरामजी! राक्षससमूहरूपी जो पतंगे थे, वे सब आपके बाणरूपी अग्रिके प्रचण्ड तेजसे भस्म हो गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 923 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दससीस बिनासन बीस भुजा। कृत दूरि महा महि भूरि रुजा।।
रजनीचर बृंद पतंग रहे। सर पावक तेज प्रचंड दहे।।2।।
स्रोत अभिलेख 7.14 · पुस्तक पृ. 923, 924
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 दससीस बिनासन बीस भुजा। कृत दूरि महा महि भूरि रुजा।।
English explanation
You destroyed Ravana, who had ten heads and twenty arms, and removed the earth’s immense suffering.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दससीस | दस सिरों वाला रावण | ten-headed Ravana |
| बिनासन | विनाश करने वाले | destroyer |
| बीस | बीस | twenty |
| भुजा | भुजाओं वाला | armed |
| कृत | किया | made |
| दूरि | दूर | removed |
| महा | बड़ी | great |
| महि | पृथ्वी की | of the earth |
| भूरि | अत्यधिक | abundant |
| रुजा | पीड़ा | suffering |
2 रजनीचर बृंद पतंग रहे। सर पावक तेज प्रचंड दहे।।2।।
English explanation
The hosts of demons were like moths; the fierce fire of your arrows burned them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रजनीचर | राक्षसों के | of demons |
| बृंद | समूह | hosts |
| पतंग | पतंगे | moths |
| रहे | थे | were |
| सर | बाण | arrows |
| पावक | अग्नि | fire |
| तेज | तेज | fiery intensity |
| प्रचंड | अत्यंत प्रबल | fierce |
| दहे | जला दिए | burned them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 923
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 923, 924
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।