उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
जय राम रमारमनं समनं। भव ताप भयाकुल पाहि जनं।।
मूल पाठ
जय राम रमारमनं समनं। भव ताप भयाकुल पाहि जनं।।
अवधेस सुरेस रमेस बिभो। सरनागत मागत पाहि प्रभो।।1।।
स्रोत अभिलेख 7.14 · पुस्तक पृ. 923, 924
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे राम! हे रमारमण (लक्ष्मीकान्त)! हे जन्म-मरणके संतापका नाश करनेवाले! आपकी जय हो; आवागमनके भयसे व्याकुल इस सेवककी रक्षा कीजिये। हे अवधपति! हे देवताओंके स्वामी! हे रमापति! हे विभो! मैं शरणागत आपसे यही माँगता हूँ कि हे प्रभो! मेरी रक्षा कीजिये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 923 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जय राम रमारमनं समनं। भव ताप भयाकुल पाहि जनं।।
English explanation
Victory to Rama, beloved of Lakshmi and reliever of suffering! Protect this person distressed by worldly suffering and fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जय | जय हो | victory to you |
| राम | हे राम | O Rama |
| रमारमनं | रमा अर्थात लक्ष्मी के प्रिय | beloved of Lakshmi |
| समनं | ताप शांत करने वाले | reliever of suffering |
| भव | संसार का | of worldly existence |
| ताप | संताप | suffering |
| भयाकुल | भय से व्याकुल | distressed by fear |
| पाहि | रक्षा करें | protect |
| जनं | इस जन की | this person |
2 अवधेस सुरेस रमेस बिभो। सरनागत मागत पाहि प्रभो।।1।।
English explanation
O lord of Ayodhya, lord of the gods, husband of Lakshmi, all-pervading Lord! One who has taken refuge begs: protect me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवधेस | हे अयोध्या के स्वामी | O lord of Ayodhya |
| सुरेस | हे देवताओं के स्वामी | O lord of the gods |
| रमेस | हे लक्ष्मीपति | O husband of Lakshmi |
| बिभो | हे सर्वव्यापक प्रभु | O all-pervading Lord |
| सरनागत | शरण में आया जन | one who has taken refuge |
| मागत | याचना करता है | begs |
| पाहि | रक्षा करें | protect me |
| प्रभो | हे प्रभु | O Lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 923
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 923, 924
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।