उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
मनजात किरात निपात किए। मृग लोग कुभोग सरेन हिए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकामदेवरूपी भीलने मनुष्यरूपी हिरनोंके हृदयमें कुभोगरूपी बाण मारकर उन्हें गिरा दिया है। हे नाथ! हे [पाप-तापका हरण करनेवाले] हरे! उसे मारकर विषयरूपी वनमें भूले पड़े हुए इन पामर अनाथ जीवोंकी रक्षा कीजिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 923 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
मनजात किरात निपात किए। मृग लोग कुभोग सरेन हिए।।
हति नाथ अनाथनि पाहि हरे। बिषया बन पावँर भूलि परे।।4।।
स्रोत अभिलेख 7.14 · पुस्तक पृ. 923, 924
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 मनजात किरात निपात किए। मृग लोग कुभोग सरेन हिए।।
English explanation
The hunter who is the god of desire has felled people, like deer, by striking their hearts with arrows of debased pleasures.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनजात | कामदेव | the god of desire |
| किरात | शिकारी | hunter |
| निपात | पतन | felling |
| किए | कर दिया | has caused |
| मृग | हिरन रूपी | deer-like |
| लोग | लोगों को | people |
| कुभोग | कुत्सित विषयभोग रूपी | of debased sensual pleasures |
| सरेन | बाणों से | with arrows |
| हिए | हृदय में | in the heart |
2 हति नाथ अनाथनि पाहि हरे। बिषया बन पावँर भूलि परे।।4।।
English explanation
O Lord, O Hari! Slay that hunter of desire and protect these helpless ones; these foolish people have strayed into the forest of sense objects.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हति | मारकर | having slain |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| अनाथनि | असहायों की | the helpless ones |
| पाहि | रक्षा करें | protect |
| हरे | हे हरि | O Hari, remover of suffering |
| बिषया | इंद्रिय-विषयों के | of sense objects |
| बन | वन में | in the forest |
| पावँर | मूढ़ जन | foolish people |
| भूलि | भटककर | having lost their way |
| परे | जा पड़े हैं | have fallen into |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 923
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 923, 924
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।