उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
तव बिषम माया बस सुरासुर नाग नर अग जग हरे।
मूल पाठ
तव बिषम माया बस सुरासुर नाग नर अग जग हरे।
भव पंथ भ्रमत अमित दिवस निसि काल कर्म गुननि भरे।।
जे नाथ करि करुना बिलोके त्रिबिधि दुख ते निर्बहे।
भव खेद छेदन दच्छ हम कहुँ रच्छ राम नमामहे।।2।।
स्रोत अभिलेख 7.13 · पुस्तक पृ. 921, 923
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे हरे! आपकी दुस्तर मायाके वशीभूत होनेके कारण देवता, राक्षस, नाग, मनुष्य और चर, अचर सभी काल, कर्म और गुणोंसे भरे हुए (उनके वशीभूत हुए) दिन-रात अनन्त भव (आवागमन)के मार्गमें भटक रहे हैं। हे नाथ! इनमेंसे जिनको आपने कृपा करके (कृपादृष्टिसे) देख लिया, वे [मायाजनित] तीनों प्रकारके दु:खोंसे छूट गये। हे जन्म-मरणके श्रमको काटनेमें कुशल श्रीरामजी! हमारी रक्षा कीजिये। हम आपको नमस्कार करते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 921 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तव बिषम माया बस सुरासुर नाग नर अग जग हरे।
English explanation
Under your formidable Maya, gods, demons, serpents, humans, and all stationary and moving beings are overwhelmed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तव | आपकी | your |
| बिषम | दुर्जेय | formidable |
| माया | माया | power of illusion |
| बस | वश में | under the sway of |
| सुरासुर | देवता और असुर | gods and demons |
| नाग | नाग | serpent beings |
| नर | मनुष्य | humans |
| अग | अचल जीव | stationary beings |
| जग | चल जीव | moving beings |
| हरे | अभिभूत हैं | are overwhelmed |
2 भव पंथ भ्रमत अमित दिवस निसि काल कर्म गुननि भरे।।
English explanation
Beset by time, karma, and the qualities of nature, they wander the path of worldly existence for countless days and nights.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भव | संसार के | of worldly existence |
| पंथ | मार्ग में | on the path |
| भ्रमत | भटकते हैं | wander |
| अमित | अनगिनत | countless |
| दिवस | दिन | days |
| निसि | रातें | nights |
| काल | काल से | by time |
| कर्म | कर्म से | by karma |
| गुननि | प्रकृति के गुणों से | by the qualities of nature |
| भरे | ग्रस्त | beset |
3 जे नाथ करि करुना बिलोके त्रिबिधि दुख ते निर्बहे।
English explanation
O Lord, those upon whom you looked with compassion were freed from the three kinds of suffering.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जिन्हें | those whom |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| करि | करके | having shown |
| करुना | दया | compassion |
| बिलोके | आपने देखा | you looked upon |
| त्रिबिधि | तीन प्रकार के | threefold |
| दुख | दुःखों | sufferings |
| ते | से | from |
| निर्बहे | मुक्त हुए | were freed |
4 भव खेद छेदन दच्छ हम कहुँ रच्छ राम नमामहे।।2।।
English explanation
Rama, able to cut away the distress of worldly existence, protect us; we bow to you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भव | संसार के | of worldly existence |
| खेद | क्लेश | distress |
| छेदन | काटने में | in cutting away |
| दच्छ | समर्थ | capable |
| हम | हम | us |
| कहुँ | को | for; to |
| रच्छ | रक्षा कीजिए | protect |
| राम | हे राम | O Rama |
| नमामहे | हम प्रणाम करते हैं | we bow |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 921
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 921, 923
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।