उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
जे ग्यान मान बिमत्त तव भव हरनि भक्ति न आदरी।
मूल पाठ
जे ग्यान मान बिमत्त तव भव हरनि भक्ति न आदरी।
ते पाइ सुर दुर्लभ पदादपि परत हम देखत हरी।।
बिस्वास करि सब आस परिहरि दास तव जे होइ रहे।
जपि नाम तव बिनु श्रम तरहिं भव नाथ सो समरामहे।।3।।
स्रोत अभिलेख 7.13 · पुस्तक पृ. 921, 923
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिन्होंने मिथ्या ज्ञानके अभिमानमें विशेषरूपसे मतवाले होकर जन्म-मृत्यु [के भय] को हरनेवाली आपकी भक्तिका आदर नहीं किया, हे हरि! उन्हें देवदुर्लभ (देवताओंको भी बड़ी कठिनतासे प्राप्त होनेवाले, ब्रह्मा आदिके) पदको पाकर भी हम उस पदसे नीचे गिरते देखते हैं। [परन्तु] जो सब आशाओंको छोड़कर आपपर विश्वास करके आपके दास हो रहते हैं, वे केवल आपका नाम ही जपकर बिना ही परिश्रम भवसागरसे तर जाते हैं। हे नाथ! ऐसे आपका हम स्मरण करते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 921 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जे ग्यान मान बिमत्त तव भव हरनि भक्ति न आदरी।
English explanation
Those intoxicated with pride in knowledge who do not cherish devotion to you, which removes worldly bondage—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| ग्यान | ज्ञान के | in knowledge |
| मान | अभिमान से | with pride |
| बिमत्त | मतवाले | intoxicated |
| तव | आपकी | your |
| भव | संसार-बंधन को | worldly bondage |
| हरनि | हरने वाली | removing |
| भक्ति | भक्ति | devotion |
| न | नहीं | not |
| आदरी | आदर किया | cherished |
2 ते पाइ सुर दुर्लभ पदादपि परत हम देखत हरी।।
English explanation
O Hari, we see them fall even from a station difficult for the gods to attain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | they |
| पाइ | प्राप्त करके | having attained |
| सुर | देवताओं के लिए | for the gods |
| दुर्लभ | दुर्लभ | hard to attain |
| पदादपि | उस पद से भी | even from that station |
| परत | गिरते हैं | fall |
| हम | हम | we |
| देखत | देखते हैं | see |
| हरी | हे हरि | O Hari, Lord Vishnu |
3 बिस्वास करि सब आस परिहरि दास तव जे होइ रहे।
English explanation
Those who trust in you, abandon all other hopes, and remain your servants—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिस्वास | विश्वास | trust |
| करि | करके | placing |
| सब | सभी | all |
| आस | अन्य आशाएँ | other hopes |
| परिहरि | त्यागकर | abandoning |
| दास | सेवक | servants |
| तव | आपके | your |
| जे | जो | those who |
| होइ | बनकर | having become |
| रहे | रहते हैं | remain |
4 जपि नाम तव बिनु श्रम तरहिं भव नाथ सो समरामहे।।3।।
English explanation
Chanting your name, they cross worldly existence without toil; O Lord, we remember you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जपि | जपकर | chanting |
| नाम | नाम | name |
| तव | आपका | your |
| बिनु | बिना | without |
| श्रम | परिश्रम | toil |
| तरहिं | पार हो जाते हैं | cross over |
| भव | संसार से | worldly existence |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| सो | उन्हीं आपका | that very you |
| समरामहे | हम स्मरण करते हैं | we remember |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 921
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 921, 923
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।