उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
जे ब्रह्म अजमद्वैतमनुभवगम्य मनपर ध्यावहीं।
मूल पाठ
जे ब्रह्म अजमद्वैतमनुभवगम्य मनपर ध्यावहीं।
ते कहहुँ जानहुँ नाथ हम तव सगुन जस नित गावहीं।।
करुनायतन प्रभु सदगुनाकर देव यह बर मागहीं।
मन बचन कर्म बिकार तजि तव चरन हम अनुरागहीं।।6।।
स्रोत अभिलेख 7.13 · पुस्तक पृ. 921, 923
भावार्थ
मूल पाठ के बादब्रह्म अजन्मा है, अद्वैत है, केवल अनुभवसे ही जाना जाता है और मनसे परे है—जो [इस प्रकार कहकर उस] ब्रह्मका ध्यान करते हैं, वे ऐसा कहा करें और जाना करें, किन्तु हे नाथ! हम तो नित्य आपका सगुण यश ही गाते हैं। हे करुणाके धाम प्रभो! हे सद्गुणोंकी खान! हे देव! हम यह वर माँगते हैं कि मन, वचन और कर्मसे विकारोंको त्यागकर आपके चरणोंमें ही प्रेम करें॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 922 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जे ब्रह्म अजमद्वैतमनुभवगम्य मनपर ध्यावहीं।
English explanation
Those who meditate on Brahman as unborn, nondual, accessible through direct experience, and beyond the mind—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो | those who |
| ब्रह्म | परम तत्त्व ब्रह्म | Brahman, ultimate reality |
| अजमद्वैतमनुभवगम्य | अजन्मा, अद्वैत और अनुभव से जानने योग्य | unborn, nondual, knowable through direct experience |
| मनपर | मन से परे | beyond the mind |
| ध्यावहीं | ध्यान करते हैं | meditate upon |
2 ते कहहुँ जानहुँ नाथ हम तव सगुन जस नित गावहीं।।
English explanation
Let them speak of and know it thus; O Lord, we ever sing the glory of your manifest form.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | they |
| कहहुँ | कहें | let them speak |
| जानहुँ | जानें | let them know |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| हम | हम | we |
| तव | आपका | your |
| सगुन | सगुण स्वरूप का | of the manifest form |
| जस | यश | glory |
| नित | नित्य | always |
| गावहीं | गाते हैं | sing |
3 करुनायतन प्रभु सदगुनाकर देव यह बर मागहीं।
English explanation
O Lord, abode of compassion and treasury of virtues, we ask this boon.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करुनायतन | करुणा के धाम | abode of compassion |
| प्रभु | हे स्वामी | O Lord |
| सदगुनाकर | सद्गुणों के भंडार | treasury of virtues |
| देव | हे देव | O divine Lord |
| यह | यह | this |
| बर | वरदान | boon |
| मागहीं | हम माँगते हैं | we ask |
4 मन बचन कर्म बिकार तजि तव चरन हम अनुरागहीं।।6।।
English explanation
May we abandon impurities of thought, speech, and action and love your feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन के | of thought |
| बचन | वाणी के | of speech |
| कर्म | कर्म के | of action |
| बिकार | विकार | impurities |
| तजि | छोड़कर | abandoning |
| तव | आपके | your |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| हम | हम | we |
| अनुरागहीं | प्रेम करें | may cherish love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 922
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 921, 923
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।