उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
अब्यक्तमूलमनादि तरु त्वच चारि निगमागम भने।
मूल पाठ
अब्यक्तमूलमनादि तरु त्वच चारि निगमागम भने।
षट कंध साखा पंच बीस अनेक पर्न सुमन घने।।
फल जुगल बिधि कटु मधुर बेलि अकेलि जेहि आश्रित रहे।
पल्लवत फूलत नवल नित संसार बिटप नमामहे।।5।।
स्रोत अभिलेख 7.13 · पुस्तक पृ. 921, 923
भावार्थ
मूल पाठ के बादवेद-शास्त्रोंने कहा है कि जिसका मूल अव्यक्त (प्रकृति) है; जो [प्रवाहरूपसे] अनादि है; जिसके चार त्वचाएँ, छ: तने, पचीस शाखाएँ और अनेकों पत्ते और बहुत-से फूल हैं; जिसमें कड़वे और मीठे दो प्रकारके फल लगे हैं; जिसपर एक ही बेल है, जो उसीके आश्रित रहती है; जिसमें नित्य नये पत्ते और फूल निकलते रहते हैं; ऐसे संसारवृक्षस्वरूप (विश्वरूपमें प्रकट) आपको हम नमस्कार करते हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 922 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अब्यक्तमूलमनादि तरु त्वच चारि निगमागम भने।
English explanation
The Vedas and Agamas describe an beginningless tree whose root is the unmanifest and whose bark has four layers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब्यक्तमूलमनादि | अव्यक्त मूल वाला, अनादि | rooted in the unmanifest, beginningless |
| तरु | वृक्ष | tree |
| त्वच | छाल | layers of bark |
| चारि | चार | four |
| निगमागम | वेद और आगम | Vedas and Agamas |
| भने | कहते हैं | describe |
2 षट कंध साखा पंच बीस अनेक पर्न सुमन घने।।
English explanation
It has six trunks, twenty-five branches, many leaves, and abundant flowers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| षट | छह | six |
| कंध | तने | trunks |
| साखा | शाखाएँ | branches |
| पंच | पाँच | five |
| बीस | बीस | twenty |
| अनेक | बहुत से | many |
| पर्न | पत्ते | leaves |
| सुमन | फूल | flowers |
| घने | घने | abundant |
3 फल जुगल बिधि कटु मधुर बेलि अकेलि जेहि आश्रित रहे।
English explanation
Its fruits are of two kinds, bitter and sweet; a single vine rests upon it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फल | फल | fruits |
| जुगल | दो | two |
| बिधि | प्रकार के | kinds |
| कटु | कड़वे | bitter |
| मधुर | मीठे | sweet |
| बेलि | लता | vine |
| अकेलि | एक ही | a single |
| जेहि | जिसके | on which |
| आश्रित | आश्रय में | dependent |
| रहे | रहती है | rests |
4 पल्लवत फूलत नवल नित संसार बिटप नमामहे।।5।।
English explanation
We bow to you as that tree of worldly existence, ever putting forth fresh leaves and flowers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पल्लवत | नए पत्ते निकालता | putting forth leaves |
| फूलत | फूलता | flowering |
| नवल | नया | fresh |
| नित | नित्य | continually |
| संसार | संसार रूपी | of worldly existence |
| बिटप | वृक्ष | tree |
| नमामहे | हम प्रणाम करते हैं | we bow |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 922
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 921, 923
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।