उत्तरकाण्ड · छंद · छंद
अबला कच भूषन भूरि छुधा। धनहीन दुखी ममता बहुधा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दस्त्रियोंके बाल ही भूषण हैं (उनके शरीरपर कोई आभूषण नहीं रह गया) और उनको भूख बहुत लगती है (अर्थात् वे सदा अतृप्त ही रहती हैं।) वे धनहीन और बहुत प्रकारकी ममता होनेके कारण दुखी रहती हैं। वे मूर्ख सुख चाहती हैं, पर धर्ममें उनका प्रेम नहीं है। बुद्धि थोड़ी है और कठोर है; उनमें कोमलता नहीं है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1004 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अबला कच भूषन भूरि छुधा। धनहीन दुखी ममता बहुधा।।
सुख चाहहिं मूढ़ न धर्म रता। मति थोरि कठोरि न कोमलता।।1।।
स्रोत अभिलेख 7.102 · पुस्तक पृ. 1004, 1005
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1अबला कच भूषन भूरि छुधा। धनहीन दुखी ममता बहुधा।।
English explanation
Women have only their hair as ornament and suffer great hunger. They are poor and unhappy, yet have many attachments.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अबला | स्त्रियाँ | women |
| कच | केश; बाल | hair |
| भूषन | आभूषण | ornament |
| भूरि | बहुत अधिक | abundant; great |
| छुधा | भूख | hunger |
| धनहीन | धन से रहित | without wealth |
| दुखी | दुःखी | unhappy; suffering |
| ममता | अपनापन और आसक्ति | possessive attachment |
| बहुधा | अनेक प्रकार की | of many kinds |
2 सुख चाहहिं मूढ़ न धर्म रता। मति थोरि कठोरि न कोमलता।।1।।
English explanation
Foolish people desire happiness but are not devoted to righteous conduct. Their understanding is limited and harsh, with no gentleness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुख | सुख | happiness |
| चाहहिं | चाहते हैं | desire |
| मूढ़ | मूर्ख लोग | foolish people |
| न | नहीं | not |
| धर्म | धर्म; सदाचरण | righteous duty and conduct |
| रता | लगे हुए; अनुरक्त | engaged in; devoted to |
| मति | बुद्धि | understanding |
| थोरि | थोड़ी; अल्प | limited; scant |
| कठोरि | कठोर | harsh |
| न | नहीं | no |
| कोमलता | कोमलता; मृदुता | gentleness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 7.102
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1004
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1004, 1005
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।