उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हरिचरित्र मानस तुम्ह गावा। सुनि मैं नाथ अमिति सुख पावा।।
मूल पाठ
हरिचरित्र मानस तुम्ह गावा। सुनि मैं नाथ अमिति सुख पावा।।
तुम्ह जो कही यह कथा सुहाई। कागभसुंडि गरुड़ प्रति गाई।।
स्रोत अभिलेख 7.53 · पुस्तक पृ. 959, 959
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे नाथ! आपने श्रीरामचरित्रमानसका गान किया, उसे सुनकर मैंने अपार सुख पाया। आपने जो यह कहा कि यह सुन्दर कथा काकभुशुण्डिजीने गरुडज़ीसे कही थी—॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 959 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हरिचरित्र मानस तुम्ह गावा। सुनि मैं नाथ अमिति सुख पावा।।
English explanation
You sang the Mānasa of Hari’s deeds; hearing it, my lord, I experienced boundless happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरिचरित्र | हरि के चरित; यहाँ राम का जीवन और कर्म | Hari’s deeds; here Rama’s life and acts |
| मानस | मानस; चरित का सरोवररूपी काव्य | Mānasa; the lake-like narrative of those deeds |
| तुम्ह | आपने | you |
| गावा | गाया; वर्णन किया | sang; narrated |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मैं | मैंने | I |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| अमिति | असीम; अपरिमित | boundless; immeasurable |
| सुख | सुख; आनंद | happiness; joy |
| पावा | पाया | experienced; obtained |
2 तुम्ह जो कही यह कथा सुहाई। कागभसुंडि गरुड़ प्रति गाई।।
English explanation
This lovely story that you recounted was sung by Kagabhusundi to Garuda.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आपने | you |
| जो | जो | which |
| कही | कही; सुनाई | told; recounted |
| यह | यह | this |
| कथा | कथा | story |
| सुहाई | सुंदर; मनोहर | lovely; charming |
| कागभसुंडि | कागभसुंडि ने; काकरूप रामभक्त मुनि | by Kagabhusundi, the crow-sage devoted to Rama |
| गरुड़ | गरुड़ को; भगवान विष्णु के पक्षीरूप वाहन | to Garuda, Vishnu’s bird mount |
| प्रति | के प्रति; को | to; addressed to |
| गाई | गाकर सुनाई | sang; narrated in song |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.53
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 959
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 959, 959
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