उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
स्वारथ साँच जीव कहुँ एहा। मन क्रम बचन राम पद नेहा।।
मूल पाठ
स्वारथ साँच जीव कहुँ एहा। मन क्रम बचन राम पद नेहा।।
सोइ पावन सोइ सुभग सरीरा। जो तनु पाइ भजिअ रघुबीरा।।
स्रोत अभिलेख 7.96 · पुस्तक पृ. 998, 998
भावार्थ
मूल पाठ के बादजीवके लिये सच्चा स्वार्थ यही है कि मन, वचन और कर्मसे श्रीरामजीके चरणोंमें प्रेम हो। वही शरीर पवित्र और सुन्दर है जिस शरीरको पाकर श्रीरघुवीरका भजन किया जाय॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 998 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 स्वारथ साँच जीव कहुँ एहा। मन क्रम बचन राम पद नेहा।।
English explanation
A living being’s true good is this: love for Rama’s feet in thought, deed, and speech.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वारथ | अपना हित | one’s own good |
| साँच | सच्चा | true |
| जीव | जीव | the living being |
| कहुँ | के लिए | for |
| एहा | यही | this very thing |
| मन | मन से | in thought |
| क्रम | कर्म से | in deed |
| बचन | वचन से | in speech |
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| पद | चरणों में | toward the feet |
| नेहा | प्रेम | love |
2 सोइ पावन सोइ सुभग सरीरा। जो तनु पाइ भजिअ रघुबीरा।।
English explanation
That body alone is holy and blessedly beautiful in which one worships Rama, the hero of Raghu’s line.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही | that alone |
| पावन | पवित्र | holy |
| सोइ | वही | that alone |
| सुभग | सुंदर और धन्य | beautiful and blessed |
| सरीरा | शरीर | body |
| जो | जिस | which |
| तनु | शरीर को | body |
| पाइ | पाकर | having obtained |
| भजिअ | भजन किया जाए | one worships |
| रघुबीरा | रघुकुल के वीर राम का | Rama, hero of Raghu’s line |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.96
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 998
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 998, 998
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