उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
स्यामल गात सरोरुह लोचन। सुंदरता मंदिर भव मोचन।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवे जन्म-मृत्यु [के चक्र] से छुड़ानेवाले, श्यामशरीर, कमलनयन, सुन्दरताके धाम श्रीरामजीको टकटकी लगाये देखते ही रह गये, पलक नहीं मारते। और प्रभु हाथ जोड़े सिर नवा रहे हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 941 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
स्यामल गात सरोरुह लोचन। सुंदरता मंदिर भव मोचन।।
एकटक रहे निमेष न लावहिं। प्रभु कर जोरें सीस नवावहिं।।
स्रोत अभिलेख 7.33 · पुस्तक पृ. 941, 942
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 स्यामल गात सरोरुह लोचन। सुंदरता मंदिर भव मोचन।।
English explanation
Rama has a dark-hued body and lotus-like eyes; he is the abode of beauty and the liberator from worldly bondage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्यामल | साँवला | dark-hued |
| गात | शरीर | body |
| सरोरुह | कमल-समान | lotus-like |
| लोचन | नेत्र | eyes |
| सुंदरता | सौंदर्य का | of beauty |
| मंदिर | धाम | abode |
| भव | संसार-बंधन से | from worldly bondage |
| मोचन | मुक्त करने वाले | liberator |
2 एकटक रहे निमेष न लावहिं। प्रभु कर जोरें सीस नवावहिं।।
English explanation
The sages kept gazing without blinking; Lord Rama, with folded hands, bowed his head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एकटक | लगातार दृष्टि लगाए | with an unwavering gaze |
| रहे | देखते रहे | kept gazing |
| निमेष | पलक झपकना | a blink |
| न | नहीं | not |
| लावहिं | करते थे | would make |
| प्रभु | प्रभु श्रीराम | Lord Rama |
| कर | हाथ | hands |
| जोरें | जोड़े हुए | folded together |
| सीस | सिर | head |
| नवावहिं | झुकाते हैं | bows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.33
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 941
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 941, 942
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।