उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो महिमा समुझत प्रभु केरी। यह बरनत हीनता घनेरी।।
मूल पाठ
सो महिमा समुझत प्रभु केरी। यह बरनत हीनता घनेरी।।
सोउ महिमा खगेस जिन्ह जानी। फिरी एहिं चरित तिन्हहुँ रति मानी।।
स्रोत अभिलेख 7.22 · पुस्तक पृ. 931, 932
भावार्थ
मूल पाठ के बादबल्कि प्रभुकी उस महिमाको समझ लेनेपर तो यह कहनेमें [कि वे सात समुद्रोंसे घिरी हुई सप्तद्वीपमयी पृथ्वीके एकच्छत्र सम्राट् हैं] उनकी बड़ी हीनता होती है। परन्तु हे गरुडज़ी! जिन्होंने वह महिमा जान भी ली है, वे भी फिर इस लीलामें बड़ा प्रेम मानते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 931 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सो महिमा समुझत प्रभु केरी। यह बरनत हीनता घनेरी।।
English explanation
When one understands that glory of the Lord, describing this earthly sovereignty greatly understates his greatness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह; पूर्वोक्त | that; previously mentioned |
| महिमा | महानता | greatness |
| समुझत | समझने पर | upon understanding |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| केरी | की | of; belonging to |
| यह | यह राजसत्ता | this earthly sovereignty |
| बरनत | वर्णन करने में | in describing |
| हीनता | छोटा करके बताना | understatement; belittlement |
| घनेरी | बहुत अधिक | very great |
2 सोउ महिमा खगेस जिन्ह जानी। फिरी एहिं चरित तिन्हहुँ रति मानी।।
English explanation
O Garuda, lord of birds, even those who have known that greatness have nevertheless found love in this account of his deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोउ | उसको भी; उस महिमा को भी | even that greatness |
| महिमा | महानता | greatness |
| खगेस | हे पक्षीराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| जिन्ह | जिन लोगों ने | those who |
| जानी | जानी; समझी | knew; understood |
| फिरी | फिर भी | nevertheless |
| एहिं | इसमें; इस | in this |
| चरित | चरित्र; कर्मों की कथा | account of deeds |
| तिन्हहुँ | उन्होंने भी | even they |
| रति | प्रेम; अनुराग | love; delight |
| मानी | अनुभव किया; स्वीकार किया | experienced; found |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 931
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 931, 932
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।