उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भूमि सप्त सागर मेखला। एक भूप रघुपति कोसला।।
मूल पाठ
भूमि सप्त सागर मेखला। एक भूप रघुपति कोसला।।
भुअन अनेक रोम प्रति जासू। यह प्रभुता कछु बहुत न तासू।।
स्रोत अभिलेख 7.22 · पुस्तक पृ. 931, 932
भावार्थ
मूल पाठ के बादअयोध्यामें श्रीरघुनाथजी सात समुद्रोंकी मेखला (करधनी)-वाली पृथ्वीके एकमात्र राजा हैं। जिनके एक-एक रोममें अनेकों ब्रह्माण्ड हैं, उनके लिये सात द्वीपोंकी यह प्रभुता कुछ अधिक नहीं है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 931 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भूमि सप्त सागर मेखला। एक भूप रघुपति कोसला।।
English explanation
AI-draft translation: Rama, lord of Raghu’s lineage and ruler of Kosala, was the sole king of the earth girdled by seven seas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भूमि | पृथ्वी | the earth |
| सप्त | सात | seven |
| सागर | समुद्र | seas |
| मेखला | करधनी; चारों ओर की घेराबंदी | girdle; encircling belt |
| एक | एकमात्र | sole |
| भूप | राजा | king |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| कोसला | कोसल देश के | of the land of Kosala |
2 भुअन अनेक रोम प्रति जासू। यह प्रभुता कछु बहुत न तासू।।
English explanation
For him whose every hair contains countless worlds, this sovereignty is no great thing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भुअन | जगत; लोक | worlds; realms |
| अनेक | अनेक | many |
| रोम | शरीर का रोम | bodily hair |
| प्रति | प्रत्येक में | in each |
| जासू | जिनके | whose |
| यह | यह | this |
| प्रभुता | राजसत्ता; अधिपत्य | sovereignty; dominion |
| कछु | कुछ; कोई विशेष बात | anything particularly |
| बहुत | बड़ी | great |
| न | नहीं | not |
| तासू | उनके लिए | for him |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.22
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 931
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 931, 932
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।