उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोइ सर्बग्य तग्य सोइ पंडित। सोइ गुन गृह बिग्यान अखंडित।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवही सर्वज्ञ है, वही तत्त्वज्ञ और पण्डित है, वही गुणोंका घर और अखण्ड विज्ञानवान् है; वही चतुर और सब सुलक्षणोंसे युक्त है, जिसका आपके चरणकमलोंमें प्रेम है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 955 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सोइ सर्बग्य तग्य सोइ पंडित। सोइ गुन गृह बिग्यान अखंडित।।
दच्छ सकल लच्छन जुत सोई। जाकें पद सरोज रति होई।।
स्रोत अभिलेख 7.49 · पुस्तक पृ. 955, 955
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सोइ सर्बग्य तग्य सोइ पंडित। सोइ गुन गृह बिग्यान अखंडित।।
English explanation
That person is all-knowing, a knower of truth and learned; that person is a home of virtues, with undivided realized knowledge—as identified in the next line. (The reading तग्य is uncertain.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोइ | वही व्यक्ति | that very person |
| सर्बग्य | सब जानने वाला | all-knowing |
| तग्य | तत्त्व को जानने वाला | knower of truth |
| सोइ | वही व्यक्ति | that very person |
| पंडित | विद्वान | learned |
| सोइ | वही व्यक्ति | that very person |
| गुन | गुणों का | of virtues |
| गृह | घर या आश्रय | home or abode |
| बिग्यान | अनुभूत तत्त्वज्ञान | realized knowledge |
| अखंडित | अखंड | undivided and complete |
2 दच्छ सकल लच्छन जुत सोई। जाकें पद सरोज रति होई।।
English explanation
That person alone is capable and endowed with every auspicious quality who has love for your lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दच्छ | दक्ष या कुशल | capable or skillful |
| सकल | सभी | all |
| लच्छन | शुभ लक्षणों | auspicious qualities |
| जुत | से युक्त | endowed with |
| सोई | वही व्यक्ति | that very person |
| जाकें | जिसके भीतर | in whom |
| पद | आपके चरण | your feet |
| सरोज | कमल | lotus |
| रति | प्रेम | love |
| होई | होता है | exists |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.49
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 955
- सहायक विषय
- श्रीराम-वसिष्ठ-संवाद, श्रीरामजीका भाइयोंसहित अमराईमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 955, 955
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।