उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
छूटइ मल कि मलहि के धोएँ। घृत कि पाव कोइ बारि बिलोएँ।।
मूल पाठ
छूटइ मल कि मलहि के धोएँ। घृत कि पाव कोइ बारि बिलोएँ।।
प्रेम भगति जल बिनु रघुराई। अभिअंतर मल कबहुँ न जाई।।
स्रोत अभिलेख 7.49 · पुस्तक पृ. 955, 955
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैलसे धोनेसे क्या मैल छूटता है? जलके मथनेसे क्या कोई घी पा सकता है? [उसी प्रकार] हे रघुनाथजी! प्रेम-भक्तिरूपी [निर्मल] जलके बिना अन्त:करणका मल कभी नहीं जाता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 955 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 छूटइ मल कि मलहि के धोएँ। घृत कि पाव कोइ बारि बिलोएँ।।
English explanation
Can dirt be removed by washing with dirt? Can anyone obtain clarified butter by churning water?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छूटइ | छूटता है | comes off |
| मल | मैल | dirt |
| कि | क्या | can it? |
| मलहि | मैल से ही | with dirt itself |
| के | से | with |
| धोएँ | धोने पर | by washing |
| घृत | घी | clarified butter |
| कि | क्या | can? |
| पाव | पा सकता है | obtain |
| कोइ | कोई | anyone |
| बारि | पानी | water |
| बिलोएँ | मथने से | by churning |
2 प्रेम भगति जल बिनु रघुराई। अभिअंतर मल कबहुँ न जाई।।
English explanation
O Rama, lord of Raghu's lineage, without the water of loving devotion, inner impurity never departs.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेम | प्रेम | love |
| भगति | भक्ति | devotion |
| जल | जल | water |
| बिनु | बिना | without |
| रघुराई | हे रघुकुल के स्वामी राम | O Rama, lord of Raghu's lineage |
| अभिअंतर | भीतर का | inner |
| मल | मैल या अशुद्धि | impurity |
| कबहुँ | कभी | ever |
| न | नहीं | not |
| जाई | दूर होता | departs |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.49
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 955
- सहायक विषय
- श्रीराम-वसिष्ठ-संवाद, श्रीरामजीका भाइयोंसहित अमराईमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 955, 955
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