उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आगम निगम पुरान अनेका। पढ़े सुने कर फल प्रभु एका।।
मूल पाठ
आगम निगम पुरान अनेका। पढ़े सुने कर फल प्रभु एका।।
तब पद पंकज प्रीति निरंतर। सब साधन कर यह फल सुंदर।।
स्रोत अभिलेख 7.49 · पुस्तक पृ. 955, 955
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[तथा] हे प्रभो! अनेक तन्त्र, वेद और पुराणोंके पढऩे और सुननेका सर्वोत्तम फल एक ही है और सब साधनोंका भी यही एक सुन्दर फल है कि आपके चरणकमलोंमें सदा-सर्वदा प्रेम हो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 955 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 आगम निगम पुरान अनेका। पढ़े सुने कर फल प्रभु एका।।
English explanation
The fruit of reading and hearing the many Agamas, Vedas, and Puranas, O Lord, is one alone—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आगम | आगम-शास्त्र | Agama scriptures |
| निगम | वेद | the Vedas |
| पुरान | पुराण-ग्रंथ | the Puranas |
| अनेका | अनेक | many |
| पढ़े | पढ़ने | reading |
| सुने | सुनने | hearing |
| कर | का | of |
| फल | परिणाम | fruit or result |
| प्रभु | हे प्रभु राम | O Lord Rama |
| एका | एक ही | one alone |
2 तब पद पंकज प्रीति निरंतर। सब साधन कर यह फल सुंदर।।
English explanation
Unceasing love for your lotus feet—this is the beautiful fruit of all spiritual practices. (The supplied तब is uncertain; context suggests तव, ‘your’.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | आपके | your |
| पद | चरण | feet |
| पंकज | कमल | lotus |
| प्रीति | प्रेम | love |
| निरंतर | निरंतर | unceasing |
| सब | सभी | all |
| साधन | आध्यात्मिक साधनों | spiritual practices |
| कर | का | of |
| यह | यह | this |
| फल | परिणाम | fruit |
| सुंदर | सुंदर | beautiful |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.49
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 955
- सहायक विषय
- श्रीराम-वसिष्ठ-संवाद, श्रीरामजीका भाइयोंसहित अमराईमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 955, 955
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।