उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जप तप नियम जोग निज धर्मा। श्रुति संभव नाना सुभ कर्मा।।
मूल पाठ
जप तप नियम जोग निज धर्मा। श्रुति संभव नाना सुभ कर्मा।।
ग्यान दया दम तीरथ मज्जन। जहँ लगि धर्म कहत श्रुति सज्जन।।
स्रोत अभिलेख 7.49 · पुस्तक पृ. 955, 955
भावार्थ
मूल पाठ के बादजप, तप, नियम, योग, अपने-अपने [वर्णाश्रमके] धर्म, श्रुतियोंसे उत्पन्न (वेदविहित) बहुत- से शुभ कर्म, ज्ञान, दया, दम (इन्द्रियनिग्रह), तीर्थस्नान आदि जहाँतक वेद और संतजनोंने धर्म कहे हैं [उनके करनेका]—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 955 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जप तप नियम जोग निज धर्मा। श्रुति संभव नाना सुभ कर्मा।।
English explanation
AI draft: Repetition of sacred names or formulas, austerity, observances, yoga, one's own duties, and the many auspicious acts prescribed by the Vedas—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जप | नाम या मंत्र का दोहराव | repetition of sacred names or formulas |
| तप | तपस्या | austerity |
| नियम | नियमित धार्मिक अनुशासन | religious observances |
| जोग | योग-साधना | yogic practice |
| निज | अपना | one's own |
| धर्मा | धर्म या कर्तव्य | religious duties |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| संभव | से उत्पन्न या प्रतिपादित | arising from or prescribed by |
| नाना | अनेक प्रकार के | various |
| सुभ | शुभ | auspicious |
| कर्मा | कर्म | acts |
2 ग्यान दया दम तीरथ मज्जन। जहँ लगि धर्म कहत श्रुति सज्जन।।
English explanation
Knowledge, compassion, control of the senses, and bathing at sacred places—all the practices that the Vedas and the virtuous call dharma—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| दया | करुणा | compassion |
| दम | इंद्रियों का संयम | restraint of the senses |
| तीरथ | तीर्थ में | at sacred places |
| मज्जन | स्नान | bathing |
| जहँ | जहाँ तक | as far as |
| लगि | तक | up to |
| धर्म | धर्माचरण | righteous or religious practice |
| कहत | कहते हैं | call |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| सज्जन | सज्जन लोग | virtuous people |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.49
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 955
- सहायक विषय
- श्रीराम-वसिष्ठ-संवाद, श्रीरामजीका भाइयोंसहित अमराईमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 955, 955
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।